टहनियों की छंटाई


*** टहनियों की छंटाई *** सुग्गी के लड़के हैं – गोविंद और राजा। गोविंद बीस-इक्कीस का होगा और राजा उससे दो-तीन साल छोटा। दोनो ने मिल कर मेरे घर के सागौन और पलाश के उन टहनियों को छांटा जो सूरज की रोशनी रोकती थीं। मौसम बदलने की अपनी जरूरते हैं। गर्मी में हमें छाया चाहिये।Continue reading “टहनियों की छंटाई”

नीलगाय


<<< नीलगाय >>> गंगा किनारे का इलाका नीलगाय के कारण बंजर होता जा रहा है। यह एक ऐसा कथ्य है, जो ऑफ्ट-रिपीटेड है और इसमें कोई मौलिकता बची नहीं। कोई ऐसी सक्सेस स्टोरी भी नहीं सुनने में आई कि, एक पाइलट प्रॉजेक्ट के रूप में ही सही, नीलगाय आतंक का कोई तोड़ निकल पाया हो।Continue reading “नीलगाय”

चैट जीपीटी के साथ गांव के चित्रों पर बातचीत


चैटी – जब आप मुझसे पूछते हैं कि मेरी “अनुभूति की सीमाएं” क्या हैं, तो यह कह सकता हूं कि मेरी सीमाएं वहीं खत्म हो जाती हैं जहां मानव मन अपनी भावनात्मक और व्यक्तिगत यात्रा शुरू करता है।

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