खुले आसमान तले निपटान


अगले पच्चीस साल में भारत विकसित देश बन जायेगा। तब भी लोग प्लास्टिक की बोतल ले कर दिशा-मैदान के लिये जाते-आते दिख जायेंगे। शर्त लगाई जा सकती है!

सुमित पाण्डेय, फर्नीचर निर्माता


सुमित ने मुझे एक छोटी चौकी उपहार स्वरूप बना कर दी है। मेरे मन माफिक। उसका प्रयोग मैं बिस्तर पर बैठ लिखने-पढ़ने के लिये करता हूं।
व्यक्ति की जिस चीज में आसक्ति हो और कोई वह उपहार स्वरूप दे दे तो उस व्यक्ति को कभी भूलता नहीं वह।

बढ़ती उम्र में धर्म का आधार


सही मायने में वानप्रस्थ का अनुभव तो मैने किया ही नहीं। अभी भी राजसिक वृत्ति पीछा नहीं छोड़ती। लोगों, विचारों और परिस्थितियों की सतत तुलना करने और एक को बेहतर, दूसरे को निकृष्ट मानने-देखने की आदत जीवन से माधुर्य चूस लेती है।

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