शिवकुटी, नारायणी आश्रम और राणा का इतिहास खण्ड



मैने कभी नहीं सोचा कि मैं इतिहास पर लिखूंगा। स्कूल के समय के बाद इतिहास बतौर एक डिसिप्लिन कभी देखा-पढ़ा नहीं। पर यहां इलाहाबाद के जिस शिवकुटी क्षेत्र में रहता हूं – गंगा के तट पर कोई चार-पांच सौ एकड़ का इलाका; वहां मुझे लगता है कि बहुत इतिहास बिखरा पड़ा है। बहुत कुछ को बड़ी तेजी से बेतरतीब होता जा रहा अर्बनाइजेशन लील ले रहा है। अत: यह जरूर मन में आता है कि इससे पहले कि सब मिट जाये या विकृत हो जाये, इसको इस ब्लॉग के माध्यम से इण्टरनेट पर सहेज लिया जाये।

मेरा किसी व्यक्तिगत काम के सन्दर्भ में श्री सुधीर टण्डन जी से मिलना हुआ। श्री टण्डन इलाहाबाद के प्रतिष्ठित टण्डन परिवार से हैं। मेरे घर के पास का रामबाग उन्ही की पारिवारिक सम्पत्ति है। (विकीमेपिया पर मेरी प्रस्तुत यह सामग्री देखने का कष्ट करें, जिसमें रामबाग की प्लेक के चित्र हैं। प्लेक में रामबाग के मालिक श्री रामचरन दास के साथ उसका सन भी लिखा है – सन 1898!)

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इण्टरनेट पर हिन्दी



वर्डप्रेस पर मैने प्रारम्भ से देखा कि ब्लॉग पोस्ट लिखते ही उसके हिन्दी होम पेज पर पोस्ट ऊपर दीखने लगती है। वर्डप्रेस पर हिन्दी में बहुत कम लिखा जा रहा है। उत्कृष्टता की कोई स्पर्धा ही नहीं है। उसके अनुसार हिन्दी ब्लॉगिंग, ब्लॉगिंग समग्र के हाशिये पर भी नहीं है। बहुत लिद्द सी दशा! Sad smile

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डेमॉर्की के निहितार्थ



karchhanaजनवरी में बीस दिन जी-ग्रुप के लोग बिछे रहे रेल पटरी पर। एक तरफ रेल परिचालन पर कोहरे की मार और दूसरी तरफ दिल्ली-बम्बई का ट्रंक रूट अवरुद्ध किये जी-ग्रुप के लोग। लोगों को असुविधा के साथ साथ अर्थव्यवस्था पर बहुत बुरा प्रभाव। अब एक हफ्ते से ज्यादा समय हो गया, माल यातायात वहन का पीक समय है, और जे-ग्रुप के लोग उत्तर-प्रदेश/हरियाणा/राजस्थान के कई रेल खण्डों पर पसरे पड़े हैं। अपनी जातिगत मांगों को ले कर। सवारी गाड़ियां अपने रास्ते से घूम कर चल रही हैं। बिजली घरों में कोयला नहीं पंहुच पा रहा, या पंहुच भी रहा है तो 200-300 किलोमीटर अधिक दूरी तय करने के बाद।

जी-ग्रुप और जे-ग्रुप। मैं जानबूझ कर उनके नाम नहीं ले रहा। इसी तरह के अन्य ग्रुप हैं देश में। कुछ दिन पहले यहां करछना पर किसान पसर गये थे पटरी पर।Continue reading “डेमॉर्की के निहितार्थ”

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