सन 2097 की पांच घटनायें (अनुगूँज 22)



Akshargram Anugunj# अनुगूँज 22: हिन्दुस्तान अमरीका बन जाए तो कैसा होगा #
अब हिन्दुस्तान, अमेरिका आज तो बनने से रहा. यह इस सदी के अंत तक होगा. तब की कल्पना निम्न है. @

सन 2097 की पांच घटनायें:

1. दलाल स्ट्रीट जर्नल को रूपर्ट भाई अम्बानी (अनिल अम्बानी के परपोते) की कम्पनी अम्बीको (रिलायंस वल्डवाइड का मीडिया फेस) ने अधिग्रहीत कर लिया है. इस कम्पनी में अर्थ जगत की बहुत सी मीडिया कम्पनियों का गुच्छा भी है. वाल स्ट्रीट जर्नल और उसकी तर्ज पर दुनियां के 27 देशों के शेयर मार्केटों के नाम पर जर्नल्स अब यह कम्पनी ही एकाधिकार से छापेगी. इसके साथ 108 देशों में उपस्थित अम्बीको मीडिया कम्पनी नम्बर 1 बन गयी है. मुकेश मर्डोक जो आजकल सेन फ्रांसिस्को में रह रहे हैं, ने रूपर्ट अम्बानी को बधाई दी है. वैसे एक फ्री लांसर ने कहा है कि पहली रियेक्शन के रूप में उसने मुकेश मर्डोक को “फ* इट!” कहते सुना. यह भी अफवाह है कि मुकेश मर्डोक सेन फ्रांसिस्को से सिकन्दराबाद शिफ्ट होने की सोच रहे हैं.

2. रूपर्ट भाई ने गिन्नी चौधरी (जीतेन्द्र चौधरी की सगी परपोती) को अम्बीको का सीईओ नियुक्त कर दिया है. गिन्नी ने अम्बीको को डाइवर्सीफाई करते हुये अपने प्रपितामह की स्मृति में नेरड नामक एग्रीगेटर (जो नेट की सारी मीडिया सामग्री को एक क्लिक पर आपके नर्वस सिस्टम में सीधे फीड कर देगा) को तीन साल में(सन 2100 तक) लांच करने की प्लानिंग की है. यह केवल एक रालर (रुपया+डॉलर) में उपलब्ध होगा. उल्लेखनीय है कि ब्लागानी नामक एग्रीगेटर जो फ्री में चार पीढ़ी पहले मैथिली जी ने शुरू किया था और जो अब 750 रालर में लोड होता है के साथ यह स्वीट रीवेंज होगा. यह रीवेंज गिन्नी चौधरी निश्चय ही लेना चाहेंगीं. मैथिली गुप्त के परपोते सिरिल III ने इस परियोजना पर अपनी गहरी असहमति व्यक्त करते हुये कहा है कि रूपर्ट अम्बानी ने ऐसी किसी परियोजना को हरी झण्डी नहीं दी है. अम्बीको में उनके भी 12% शेयर हैं और उनसे इस तरह पैसे बरबाद करने की कोई सहमति नहीं ली गयी. (यह अलग बात है कि गिन्नी की घोषणा के बाद अम्बीको के शेयर में उछाल आया है!) वरुण अरोड़ा (पंगेबाज IV) ने सिरिल III का समर्थन किया है. पर अनूप IV शुक्ल ने बीचबचाव में कहा है कि किसी भी विवाद को फुर्सत से निपटा लिया जाये.

3. हिन्दी ब्लॉग-साहित्य लेखक फाउडेशन जो गूगल एडसेंस से हुई कमाई का कमर्शियल ट्रस्ट है; ने रोमनिया गांधी और प्रतिमा पाटीळ के विरोध में अश्रद्धा अभियान की घोषणा की है. अश्रद्धा को समूह में जलती मोमबत्तियां बुझाकर अनूठे अन्दाज में व्यक्त किया जायेगा. ब्लॉग-साहित्य लेखक फाउडेशन के संयोजक (समय तिवारी – अभय के परपोते) के अनुसार यह तरीका ऋग्वेद सम्मत है.

यह कमर्शियल ट्रस्ट जबलपुर में तीन कमरे के घर में रहने वाले गरीबों को बदले में हिसार – जो दिल्ली का सबर्ब है, में 111 वीं मंजिल पर 4 बेड रूम वाले फ्लैट देता है. जबलपुर में रिलीज होने वाली रीयल एस्टेट पर कमर्शियल ट्रस्ट की योजना एक बड़ा रीटेल आउटलेट बनाने की है जहां अश्रद्धावानों को श्रद्धा सस्ते दाम पर मिलेगी. इस प्रकार अश्रद्धा अभियान और श्रद्धा का रीटेल आउटलेट का एक साथ काम जबरदस्त मार्केटिंग स्ट्रेटेजी के रूप में देखा जा रहा है. इसको लेकर सारे हिन्दी ब्लॉग-साहित्य लेखक लामबन्द हैं और अपने अपने ब्लॉग लेखन की बजाय फुल टाइम अश्रद्धा अभियान के प्रचार में जुटे हैं. हिन्दी ब्लॉग पोस्ट जो प्रतिदिन 405 लाख के आस-पास होती थीं , घट कर 203 लाख/दिन रह गयी हैं. इससे गूगल इण्डिया डैमेज कण्ट्रोल में लग गया हैं. वैसे उनके अनुसार एडसेंस की आमदनी घटते ही लेखक झख मार कर ब्लॉग लेखन पर जल्दी लौटेंगे.

4. ज्ञानोदय नामक एनजीओ जो इलाहाबाद के पास करछना में बेस्ड है; ने अमेरिका में ब्रेन ट्रांसप्लाण्ट कैम्प की श्रृंखला लगा कर गरीब अमेरिकनों को उनके ब्रेनडैमेज के बारे में जानकारी देने का काम किया है. उसकी पूरे अमेरिका भर में भूरि भूरि प्रशंसा हुई है. एक मामले में जहां एक अमेरिकी महिला ने अपने प्रेमी का ब्रेन मिक्सी में पीस दिया था, पुन: यथावत रिस्टोर करने में इस एनजीओ के डाक्टरों को सफलता हाथ लगी है. पर इसे भारत के बेनाम ब्लॉगर ग्रुप (बीबीजी) ने स्टण्ट और प्राचीन काल से चली आ रही हाथ की सफाई करार दिया है.

5. हिन्दी की अभूतपूर्व वृद्धि को देखते हुये कलकत्ते के शुभंकर जी (जो प्रियंकर जी के सुयोग्य प्रपौत्र हैं) ने यह घोषणा की है कि वे किसी भी कम्प्यूटर में अंग्रेजी या योरोपीय भाषा का माइक्रोसोवेयर (सॉफ्टवेयर का फ्यूचर संस्करण) बर्दाश्त नहीं करेंगे. ऐसे कम्प्यूटरों की होली सार्वजनिक रूप से जलाई जायेगी. बिल-नारायण मूर्ति; जो माइक्रोसोवेयर की दुनिया की सबसे बड़ी फर्म “खिड़की” के मालिक हैं, ने केम्पेगौड़ा रिजॉर्ट मे छुट्टियां मनाते हुये यह कहा बताया है कि भविष्य के “खिड़की” माइक्रोसोवेयर संस्करण केवल संस्कृत बेस्ड भाषाओं को मान्यता देंगे. इससे पूरे पश्चिम में असंतोष फैल गया है. पर वे देश अपने को इस तकनीकी जॉयेण्ट के सामने असहाय पा रहे हैं. शुभंकर ने इसे भारत की ऐतिहासिक जीत बताते हुये मांग की है कि “खिड़की” को परिष्कृत कर “वातायन” या “गवाक्ष” ब्राण्ड से उतारा जाये, जिससे हिन्दी की और सेवा हो सके.
(बस, इससे ज्यादा लिखवायेंगे तो हम अंग्रेजी उगलने लगेंगे और मसिजीवी को महान कष्ट होगा!)


टैगः ,
@- इटैलिक्स में जो लिखा है वह सन 2007 का लिखा है. शेष सन 2097 का है.

ब्लॉग सेग्रीगेटर – बहुमूल्य सुझावों पर टिप्पणी-चर्चा



मेरी परसों की पोस्ट ब्लॉग सेग्रीगेटर – पेरेटो सिद्धांत लागू करने का जंतर चाहिये पर बड़ी काम की टिप्पणियां मिलीं. सभी को धन्यवाद. मै प्राप्त बहुमूल्य सुझावों को एक जगह पर रखता हूं:

  1. ब्लॉगवाणी में पसन्द की सुविधा का प्रयोग किया जाये.
  2. पाठकों का सहयोग पठन सामग्री के चयन में जरूरी है. सबसे ज्यादा पढ़े ब्लॉगों का चयन एक तरीका हो सकता है.
  3. 24 घण्टे के दिन में सब मैनेज किया जा सकता है, अत: वर्तमान स्थिति में कोई ज्यादा परेशानी नहीं है.
  4. यह सेग्रीगेशन दो आधार पर हो सकता है – प्रविष्टि के लेखक के आधार पर और प्रविष्टि की सामग्री में मौजूद कुछ खास शब्दों पर.
  5. यदि आपको किसी का लेख पसन्द आया, तो उसका सन्दर्भ अपने लेख में दें. इस प्रकार अनौपचारिक प्रकार से आदान-प्रदान करें.
  6. लोग अपने अपने पसंदीदा ब्लॉग पोस्ट की लिस्ट बनाए. आप http://del.icio.us/ का सहारा ले सकते है। सभी लोग अलग अलग विषय पर एक यूनिक टैग का इस्तेमाल करें.
  7. उसके बाद जिस लेख को सबसे ज्यादा लोगों ने पसन्द किया, उसको अपने ब्लॉग के साइड बार मे अथवा प्रमुखता देते हुये चिपकाएं.

कुल मिला कर बात आती है कि पाठक स्वयम तय करें कि क्या पठनीय है. उसे या तो हिन्दी एग्रेगेटरों पर दर्शाया जाये ( ब्लॉगवाणी की “पसन्द”, या पोस्टों की क्लिक या नारद के लोकप्रिय लेखों की लिस्ट) या फिर इनफॉर्मल तरीके से सदर्भ दे कर, गप-शप के वर्ड-ऑफ माउथ से प्रोमोट किया जाये. यह हो तो रहा है. पर जैसा मैथिली जी ने कहा है, ब्लॉगवाणी पर “पसन्द” का प्रयोग लोग सीरियसली नहीं कर रहे हैं. इसी प्रकार नारद पर लोकप्रिय लेख पठनीयता के आधार पर नहीं, क्लिक के आधार पर तय होते हैं. क्लिक और पठनीयता में साम्य है भी और नहीं भी है! अत: पसन्द/लोकप्रिय लेख को “पिंच ऑफ सॉल्ट” के साथ ही लेना चाहिये! एक दूसरे के लेख को लिंक करने की प्रथा अभी हिन्दी में जोर नहीं पकड़ी है.

यूनीक टैग लगाने, डेल.ईसी.एस. (या उस प्रकार का अन्य यंत्र) का प्रयोग कर प्रेषित करने और उसके परिणाम बहु प्रचारित करने का तरीका शायद अल्टीमेट तकनीकी समाधान है. यूनीक टैग के विषय में हमारे सभी एग्रीगेटर पहल कर सकते हैं. डेल.ईसी.एस. पर तो मैने देख लिया है, हिन्दी के टैग ठीक से काम करते हैं. हिन्दी ब्लॉग पाठक और ब्लॉग लेखक को शायद इस विषय में सरल शब्दों में जानकारी दिये जाने की आवश्यकता है, जिसके लिये जीतेन्द्र (जिन्होने टिप्पणी की थी) से एक लेख लिखने का अनुरोध करता हूं.

अभी मैने जो किया है वह यह है – अपने गूगल रीडर पर जो कुछ उत्कृष्ट पढ़ रहा हूं, उसे स्टार-टैग कर ले रहा हूं और उसको बतौर पब्लिक पेज देने की सुविधा गूगल रीडर देता है तथा उसकी क्लिप मैं अपने ब्लॉग पर पोस्ट/पोस्टों के नीचे “ज्ञानदत्त का स्टार पठन का चयन” के रूप में प्रस्तुत कर रहा हूं. इस क्लिप में ताजा 5 पोस्टें हैं और अधिक पढ़ने के लिये Read more पर क्लिक किया जा सकता है. यही अन्य सज्जन भी कर सकते हैं. पहले मैं इस स्थान पर चयनित ब्लॉग्स की ताजा फीड्स दिखाता था, अब चयनित पोस्ट या मेटीरियल की फीड दिखा रहा हूं. इस प्रकार जीतेन्द्र की सलाह पर अमल कर रहा हूं. इससे आलोक जी का कहा, कि अगर आपको लेख पसन्द आया है तो उसे अपने ब्लॉग पर प्रचारित करें, की भी कुछ सीमा तक अनुपालना हो जाती है.

कुल मिला कर ब्लॉग लेखक/पाठक अपने स्तर पर भी अपने पास उपलब्ध टूल्स से सेग्रीगेशन की पहल कर सकते हैं.

कल आलोक जी ने 9-2-11 में हिन्दी का डिग्ग हिन्दीजगत को बताया. पर लगता है इसपर और काम करना होगा. अभी तो यह हमें रजिस्टर भी नही करा रहा. दूसरे, पोस्ट सुझाने के लिये जो सरल उपाय डेल.ईसी.एस/डिग्ग पर हैं, वह इसपर तो प्रारम्भ में नहीं होंगे.

मैं नुक्ताचीनी वाले देबाशीष को ब्लॉग पोस्ट पर टिप्पणी के लिये औपचारिक रूप से ढ़ूंढ़ना चाहूंगा. वैसे तो मैं उन्हें ई-मेल कर सकता हूं, पर बहुत प्रसन्नता होगी अगर वे अपने विचार ओपन फॉरम में रखें. वे “सप्ताह के 30 स्वादिष्ट पुस्तचिन्ह” अपने डेल.ईसी.एस. पुरालेखागार से प्रस्तुत करते हैं. अत: वे काम की बात बता सकते हैं.


कोई किसी को पानी भी नहीं पिलायेगा!



बाबा भारती और डाकू खड़ग सिंह की कहानी हम सब पढ़ कर बड़े हुये हैं. बाबा भारती के घोड़े सुल्तान को डाकू खड़ग सिंह अपहृत करने में कामयाब होता है. बाबा भारती उसे बुला कर कहते हैं – घोड़ा ले जाओ पर यह मत कहना कि किस प्रकार से तुमने चुराया है. अन्यथा लोग गरीबों पर विश्वास करना बन्द कर देंगे. सुदर्शन की इस कहानी में इंसानियत का बहुत बड़ा सबक है.

आज यही इंसानियत का विश्वास डगमगाने की कथा सुनाई हमारे चीफ सिक्यूरिटी कमिश्नर महोदय ने.

उन्होने बताया कि अमुक जंक्शन के पास अमुक एक्सप्रेस में एक व्यक्ति ने साथ चलते दूसरे व्यक्ति से कहा कि उसे प्यास लगी है. क्या वे उसे अपनी पानी की बोतल में से कुछ पानी दे सकते हैं? दूसरे व्यक्ति ने पानी की प्लास्टिक की बोतल आगे बढ़ा दी. पहले व्यक्ति ने बोतल से (बिना मुंह लगाये) ऊपर से कुछ घूंट पानी पिया. बोतल वापस करते समय दूसरे यात्री ने देख लिया कि पहले यात्री ने बड़ी सफाई से बोतल में दो टैबलेट डाल दी हैं. दूसरे यात्री ने शोर मचाया कि यह टैबलेट कैसे मिला रहे हो. तुरंत चेन पुल्लिंग हुई और दो लोग गाड़ी रोक कर उतर कर भाग गये. यह पहला यात्री दबोच लिया गया. उसके पास नशीले टैबलेट की पूरी शीशी पायी गयी.

चीफ सिक्यूरिटी कमिश्नर महोदय ने बताया कि जहर खुरानी की इस गैंग को बस्ट करने के पर्याप्त सुराग मिल चुके हैं. तेजी से कार्रवाई हो रही है.

चीफ सिक्यूरिटी कमिश्नर महोदय स्वयम बड़े संवेदनशील व्यक्ति हैं. उन्होने ही सुदर्शन की कहानी का हवाला दे कर बताया – पानी पिलाना हम लोगों की सभ्यता में कितना पुण्य का कार्य माना जाता है. इस तरह की घटनायें तो लोगों में इंसानियत की भावना ही मार देंगी. लोग प्यासे को पानी देना भी बन्द कर देंगे.

असुर की हिंसा वृत्ति कई प्रकार से सामने आती है. सीधे-सीधे जाहिर होने वाली हिंसा तो फिर भी सरल है. जब यह इंसानियत के भेस में या इंसानियत को छल कर सामने आती है तो इसके परिणाम दूरगामी और मानवीय मूल्यों पर आघात करने वाले होते हैं.

भगवान हम सब में इस छल-छद्म के बावजूद बाबा भारती वाली मानवता बनाये रखें.


ब्लॉगर.कॉम की अंग्रेजी सैटिंग स्वत: पब्लिश करने का समय नहीं तय करती. वह पोस्ट क्रियेट करने का समय ही होता है. अत: गलती से यह पोस्ट कल की डेट में पब्लिश हो गयी है. मैं इसे पुन: पब्लिश कर रहा हूं. पहले पब्लिश की गयी पोस्ट पर आलोक पुराणिक और अनूप शुक्ल के कमेण्ट हैं.


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