मुराहू पण्डित के साथ साइकिल से गंगा घाट


मंदिर छोटा है, पर पुराना है और अच्छा लगता है। उस मंदिर की चारदीवारी बनाने की कथा भी पण्डित जी ने बतायी। ईंटवाँ के ही फलाने जी का छ क्विण्टल गांजा पकड़ा गया था। उस मामले में बरी होने पर उन फलाने जी ने यह जीर्णोद्धार कराया।

ईंटवाँ गंगा घाट पर नित्य स्नान करने वाला लालचंद


वह एक तौलिया पहने है। हाथ में कचारा हुआ कपड़ा और कांधे पर लुंगी। घर से एक लाठी और तौलिया भर ले कर आता होगा गंगा स्नान के लिये। बाकी, नहाने-सुखाने और कपड़ा कचारने का काम तो गंगा किनारे होता है। उसके पैरों में चप्पल भी नहीं है।

गंगा आरती @ गौगंगागौरीशंकर


पास में ही शमी का वह वृक्ष है, जिसे कल मेरी पत्नीजी और मैंने अपने घर से लाये दियों को सजाने के लिये चुना था। शमी में एक कोटर है। उसमें आरपार दिखता है। उस कोटर में भी एक दिया रखा था। आज सवेरे देखा तो सभी दिये वहां जस के तस थे।

मनोज सिंह की नाव का वार्षिक अनुरक्षण


मनोज सिंह की नाव अपेक्षाकृत छोटी है – मारुति कार जैसी। उसपर एक लाख का ओवरहाल खर्च करने पर उसकी लाइफ 7-10 साल बढ़ जायेगी। वह बनी थी तो यूकलिप्टस की थी। जल्दी खराब हो गयी। अब वे साखू की लकड़ी ही लगवायेंगे।

उफान पर हैं गंगा


गंगा के बहाव का वेग दर्शा रहा था कि अभी बाढ़ थमेगी नहीं। पानी बढ़ेगा। कभी कभी तो बहाव आता है। बहाव का, जलराशि का स्वागत!