युगांत – इरावती कर्वे – पुस्तक पर पॉडकास्टिकी


युगांत – एक युग का अंत; पुस्तक इतनी रोचक है कि हम पॉडकास्ट में नौसिखिये होने के बावजूद इस पुस्तक पर परिचयात्मक चर्चा से अपने को रोक नहीं पाये।

#200शब्द – कैलाश दुबे


मुझे यह लगा कि यूंही, कैलश जी के पास जाया और बैठा जा सकता है। धर्म और अर्थ को सरलता के मधु में जिस कुशलता से उन्होने साधा है, वह अभूतपूर्व है।

पहले का ग्रामीण रहन सहन और प्रसन्नता


लोग सामान्यत: कहते हैं कि पहले गरीबी थी, पैसा कम था, मेहनत ज्यादा करनी पड़ती थी, पर लोग ज्यादा सुखी थे। आपस में मेलजोल ज्यादा था। हंसी-खुशी ज्यादा थी। ईर्ष्या द्वेष कम था।

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