व्यास जी और महाकाव्य सृजन


मार्च’5, 2017: सवेरे की साइकलिंग में हम चले जा रहे थे। राजन भाई और मैं। राजन भाई से मैने कह दिया था कि सड़क-सड़क चलेंगे। पगडण्डी पर साइकल चलाने में शरीर का विशिष्ट भाग चरमरा उठता है। पर राजन जी ने बीच में अचानक पगडण्डी पकड़ ली थी और मैं पीछे चले जा रहा था।Continue reading “व्यास जी और महाकाव्य सृजन”

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