मदन मोहन पाण्डेय, उम्र 93 वर्ष


पिछली बार मदन मोहन जी से मिला था एक महीना पहले। आज फिर मिलना हुआ। वे और उनकी पत्नीजी खटिया पर बैठे थे। दोनो ही नब्बे के पार होंगे (या पत्नीजी नब्बे के आस पास होंगी)। वे स्वयम तो 93+ हैं। नब्बे के पार की उम्र और चैतन्य! कुछ कृशकाय हो गये हैं पर कद काठीContinue reading “मदन मोहन पाण्डेय, उम्र 93 वर्ष”

श्री बालकृष्णदास “व्यास” से एक और मुलाकात


आज योगेश्वरानन्द आश्रम के बाहर मैं और राजन भाई थे। बालकृष्णदास व्यास जी अपने कक्ष से बाहर निकल आये। शायद आहट से। उनसे बातचीत होने लगी। इधर उधर की बातचीत से प्रारम्भ हुई और मेरी पिछली पोस्ट के माध्यम से बालकृष्णदास व्यास जी के परिचय पर आ गयी। उन्होने अपने विषय में जो कुछ बताया,Continue reading “श्री बालकृष्णदास “व्यास” से एक और मुलाकात”

भूसा और खबर


सवेरे साइकिल-सैर में जाते हुये पाया था कि उस खेत में थ्रेशिंग के बाद गेंहूं वहां से हटाया जा चुका था। भूसा भी एक ट्रेक्टर-ट्रॉली में ट्रॉली की ऊंचाई तक लादा जा चुका था। बाकी बचा अधिकांश भूसा झाल (पुरानी धोती-साड़ी के बोरों) में इकठ्ठा कर दिया गया था। चहल पहल थी वहां। लग रहाContinue reading “भूसा और खबर”

कमहरिया और बालकृष्णदास व्यास जी


उस शाम हम (राजन भाई और मैं) फिर कमहरिया के लिये साइकल पर निकले। शाम का समय था। यह सोचा कि आधा घण्टा जाने, आधा घण्टा आने में लगेगा। वहां आधे घण्टे रहेंगे व्यास जी के आश्रम में। शाम छ बजे से पहले लौट आयेंगे। जो रास्ता हमने चुना वह लगभग 80% पगडण्डी वाला था।Continue reading “कमहरिया और बालकृष्णदास व्यास जी”

देहात महुआ बीनने में लगा है


बच्चे पॉलीथीन की पन्नियां, महिलाये और पुरुष दऊरी या अन्य कोई बर्तन लिये जमीन पर गिरे पीले फूल बीनते दिखते हैं। भीनी भीनी गंध पूरे वातावरण में बसी है। मेरे तो घर में कमरों में भी, जब हवा तेज होती है तो यह गंध घुस आती है। कुछ फूल बीन लाओ तो उसके आसपास गंधContinue reading “देहात महुआ बीनने में लगा है”

धईकार बस्ती का दऊरी कारीगर


दऊरी की बुनावट देखी मैने। बहुत सुघड़ थी। बांस की सींकें जो प्रयोग की गयी थीं, उनमें कहीं कोई एसा कोना नहीं था जिससे उपयोग करने वाले की उंगलियों में फांस लग जाये। दऊरी का आकार भी पूर्णत:अर्ध गोलाकार था।