राजकुमार साहनी की नाव #गांवकाचिठ्ठा #गांवकेचरित्र

राजकुमार की उम्र तैतीस साल की है। देखने में वे उससे भी कम उम्र के लगते हैं। उनका कहना है कि अपने शरीर की सुनते हैं। किसी दिन खूब मेहनत करने का मन होता है तो करते हैं। किसी दिन आराम करने का मन हुआ तो वह कर लेते हैं।


मैं सीताराम से मिलने गया था। पंद्रह मिनट पहले घर से निकला। भोर में पौने पांच बजे। अंधेरा छंटा भी न था, जब घर से साइकिल ले कर चला। द्वारिकापुर गंगा घाट पर पंहुचा, तब भी सूर्योदय का समय नहीं हुआ था। सीताराम नाव पर नहीं थे। निवृत्त होने गये थे शायद। उनके जोड़ीदार चंद्रमोहन मिले। पास की नाव पर एक नौजवान दोहर ओढ़ कर लेटा था।

राजकुमार साहनी।

सीताराम आये तो मैंने ब्लॉग पर अपनी पोस्ट दिखाई।

उससे उनको स्पष्ट हुआ कि उनके बारे में जानकारी लेने का ध्येय उनपर लेख लिखना है। मेरे बहुत से पात्रों को अपने बारे में लिखा पढ़ने का शौक नहीं होता, पर अपने बारे में ब्लॉग पर लिखा देख कर और उसमें अपने चित्र देख कर उनकी प्रसन्नता देखते ही बनती है। सीताराम इस दूसरी प्रकार के जीव निकले। तब तक बगल की नाव में लेटा नौजवान पास आ गया था। उसे मेरे मोबाइल में लिखा लेखन रोचक लगा। पहले सामने खड़े हो और फिर अपनी नाव के कोने पर बैठ कर उसने अपने बारे में बहुत कुछ बताया।

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