अलाव

कल आसमान खुला नहीं। सवेरे सूरज समय पर दिखे पर उनकी आभा नहीं थी। आसमान में आग के गोले की तरह नहीं, माथे की टिकुली जैसे थे। एक केसरिया रंग का छोटा सा बटन। उसके बाद बादल ही छाये रहे दिन भर।

आसमान में आग के गोले की तरह नहीं, माथे की टिकुली जैसे थे सूरज

इन सर्दियों के मौसम में पहला ही दिन था, जब कऊड़ा (अलाव) की जरूरत महसूस हुई। और जब अलाव जला तो पूरे दिन जलता रहा।

पहले अलाव का कल का ट्वीट

गर्म लकड़ियों के टुकड़े चिमटे की सहायता से अलाव से निकाल कर एक पानी के तसले में ठण्डा किये गये और काफी चारकोल भी बनाया गया। यह चारकोल घर के अंदर सिगड़ी जला कर गर्मी लाने के लिये उपयोगी रहेगा। आशा है, आने वाले महीना डेढ़ महीना में कुछ दिन तो ऐसे होंगे ही जिसमें घर के अंदर गर्माहट के लिये सिगड़ी की जरूरत हो। पिछली सर्दियों में महीनों सिगड़ी जलानी पड़ी थी और लकड़ी का कोयला बहुत मंहगे दाम (लगभग दूध के भाव) खरीदना पड़ा था। इस साल हम पहले से ही सतर्क हो गये हैं। घर में जलाऊ लकड़ी पर्याप्त है। अलाव जला कर बैठने और वहां चारकोल बनाने का काम भी चलेगा।

कल अलाव में शकरकंद और आलू भूने गये। भुने कंदों का स्वाद लाजवाब था। शाम के समय और भी शकरकंद बाजार से मंगवा ली है। यह भी पढ़ा है कि मधुमेह का मरीज भी थोड़ा बहुत शकरकंद खा सकता है। सो मैंने सीमित मात्रा में भुनी कंद खाई। फेसबुक और ट्विटर पर सलाह मिली की मूंगफली और बैंगन भी अलाव में भूने जा सकते हैं। उनके साथ भी, आने वाले दिनों में प्रयोग होंगे।

अलाव का इतिहास मानव के सभ्य होने का इतिहास है। आग के किनारे गोलबंद आदमी सामाजिक बना। प्रज्वलित होती आग को निहारते समय अगर आदमी मौन हो कर सोचने की प्रक्रिया में उतरे तो जीवन, उसकी सार्थकता, मरण और मरण के आगे के कई प्रश्न तैरने लगते हैं। उन प्रश्नों और विचारों को सयास पकड़ना और भविष्य के लिये संंजोना एक अभूतपूर्व अनुभव है।

यह अनुभव कल कुछ सीमा तक मिला और आगे कई कई दिनों तक मिलता रहेगा। 🙂


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अलाव हमारे लिये तो आवश्यकता कम, सर्दियों का अनुभव ज्यादा है। पर गांव में घूमते हुये जगह जगह जलते अलाव और उसके इर्दगिर्द ठिठुरते बैठे लोगों को देख कर स्पष्ट होता है कि कऊड़ा सर्दियां काटने की अनिवार्यता है। रात किसी प्रकार लोग गुजारते हैं। आजकल धान का पुआल इफरात में उपलब्ध है। उसे जमीन या तख्ते पर बिछा कर लोग सोते हैं। भोर होते ही उठ कर कऊड़ा जलाने का उपक्रम करने लगते हैं। पिछले दिन जो भी घास-फूस, टहनियां, बटोरन जमा की होती हैं; उनको जमा कर अलाव जलता है और उसी के इर्दगिर्द सवेरे का भोजन बनाने का भी उपक्रम होता है। सवेरे पांच बजे से नौ-साढ़े नौ बजे तक अलाव की मॉर्निंग शिफ्ट चलती है। शाम पांच बजे फिर अलाव जलाने की जुगत मेंं लग जाते हैं ग्रामीण। वैसे शाम का कऊड़ा उतना नहीं प्रचलित जितना सवेरे का।

दो साल पहले सिद्धिनाथ मंदिर में बहेतू पशुओं की गौशाला चलाने वाले जोगी बाबा पर ब्लॉग पोस्ट लिखी थी – जोगी बाबा – सिद्धिनाथ मन्दिर का साधू और अनाथ गौवंश को पालनेवाला। वह विलक्षण साधू दिन भर धूनी (अलाव) जलाये रहता था। सर्दियों में उस अलाव और साथ में चाय/चिलम की उपलब्धता से अनेक श्रद्धालु जुट जाते थे। उन्हीं के माध्यम से जोगी बाबा को अपने आश्रम की गौशाला के लिये स्वयमसेवक मिल जाते थे।

धूनी के पास मेरे लिये चाय बनाते जोगी बाबा। चित्र तीन साल पहले का है।

अलाव के महत्व को मैंने जोगीबाबा के सम्पर्क में गहराई से अनुभव किया था। मैं उनसे तीन साल पहले मिला था। अभी भी उनके बारे में समाचार मिलता है कि वे उसी प्रकार निराश्रित गायों को आश्रय प्रदान कर रहे हैं। उनके इस कार्य में अलाव/धूनी की भी एक भूमिका है।

रात में अलाव बुझाने का समय हो गया है!

आज का अलाव तो उत्सव जैसा रहा। वह स्थान – पोर्टिको में एक ओर, गमलों और पौधों से कुछ दूर जिससे अलाव का धुआँ वनस्पति पर दुष्प्रभाव न डाले – एक रंगमंच सा रहा; जहां पात्र आते जाते रहे। शाम के समय तो राजन भाई भी आ गये। वे भी देर तक बैठे रहे, अलाव की गर्मी तापते। मैं जिस विचार में डूबने और भूत-भविष्य-वर्तमान पर अपनी सोच कुरेदने की बात ऊपर कर रहा था; उसका समय तो आगे आने वाले दिनों में आयेगा। तब देखें वह सब धुयें की तरह तैर कर निकल जायेगा या फिर भविष्य के जीवन में बदलाव के सूत्र भी उसमें निकलेंगे।

बहरहाल सर्दी का मौसम, कोहरा, बादल और लम्बे समय तक कऊड़ा/अलाव के समीप बैठना एक ऐसा टाइम ड्यूरेशन है, जिसकी प्रतीक्षा का समय खत्म हो गया है। अनुभूतियों का समय आ गया है।

मस्त रहो, जीडी!


Published by Gyan Dutt Pandey

Exploring village life. Past - managed train operations of IRlys in various senior posts. Spent idle time at River Ganges. Now reverse migrated to a village Vikrampur (Katka), Bhadohi, UP. Blog: https://gyandutt.com/ Facebook, Instagram and Twitter IDs: gyandutt Facebook Page: gyanfb

One thought on “अलाव

  1. वास्तव में आपके जीवन के अदभुत अनुभव को अपना सा मान कर महसूस करना भी एक शानदार अनुभव है.

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