मुराहू पंडित से दीर्घ जीवन के सूत्रों पर चर्चा

मुराहू पण्डित (मुराहू उपाध्याय) मेरे गांव से पांच किलोमीटर पर लीलापुर गांव में रहते हैं। उनकी उम्र सतासी वर्ष की है। वे अध्यापक रहे। निश्चय ही उत्कृष्ट अध्यापक रहे होंगे। उन्होने राष्ट्रपति श्री शंकर दयाल शर्मा जी से पदक पाने का चित्र दो-तीन साल पहले मुझे दिखाया था। उस समय वे रंंहठा (अरहर के डण्ठल का बण्डल) से बनी झाड़ू से अपने घर के दुआर को बुहार रहे थे। उस समय भी मैं उनकी ऊर्जा और इतनी उम्र में जवानी का कायल हो गया था।

मुराहू पण्डित

मुराहू पण्डित को मैं सामान्यत: आते जाते देखता रहता हूं। वे मेरे घर के बगल से ही रोज गंगा स्नान करने जाते हैं। रोज सात किलोमीटर जाना और लौटना, गंगा स्नान कर गंगाजल का जरीकेन साइकिल पर लटकाये लौटना – उनकी नियमित दिनचर्या है। वे जब भी लौटते हुये मिल जाते हैं, मुझे मेरी अंजुरी में गंगाजल जरूर देते हैं पीने के लिये।

पांच जून को वे मेरे घर के पास ही मिले थे। साइकिल से गंगास्नान को जा रहे थे। उनके चित्र को मैंने ट्विटर पर पोस्ट किया तो एक महिला, अंशु दुबे जी ने उनकी दिनचर्या और पथ्य पालन की जानकारी के बारे में जिज्ञासा व्यक्त की थी।

अंशु दुबे जी की ट्वीट

मैं लीलापुर (मुराहू पण्डित जी के घर) तो अब तक नहीं जा पाया, पर आज वे फिर रास्ते में मिल गये। एक महिला को वे अल्सर की दवा बता रहे थे। मैंने उन्हे प्रणाम किया और अंशु जी की उनकी दीर्घजीविता के बारे में जिज्ञासा का जिक्र किया। वे प्रगल्भ व्यक्ति हैं। वहीं बताने लगे कि कम खाना, परिश्रम, व्यायाम, नियमित दिनचर्या और तनावमुक्त जीवन जीना – यही मुख्य बिंदु हैं। उन्होने जो कहा, वह वहीं अपनी साइकिल थामे, अपनी साइकिल पर बैठे बैठे मैंने मोबाइल में भरा। आसपास चरवाहे, ऑटो रिक्शा, मोटरसाइकिल वाले आ जा रहे थे। वे सब जम दोनों से बच कर बगल से निकलते रहे। अपनी बताते बताते मुराहू पण्डित मेरी प्रशंसा के मोड में आ गये। तब उन्हे मुझे रोकना पड़ा। फिलहाल, उन्होने जो कहा वह निम्न पॉडकास्ट में प्रस्तुत है। उनकी रिकार्डिंग बहुत स्पष्ट नहीं है। मुझ नौसिखिये पॉडकास्टक की गलती है उसमें। आपको अभिप्राय फिर भी स्पष्ट हो जायेगा। कृपया सुनें –

मेरा मुराहू पण्डित से साइकिल-चर्चा का पॉडकास्ट

यह मेरा प्रथम विधिवत (और अनगढ़) पॉडकास्ट है। कृपया उसके तकनीकी पक्ष की अशुद्धि को नजर अंदाज करें। बहरहाल, मुराहू उपाध्याय जी से बातचीत पर्याप्त नहीं हुई है। उनका फोन नम्बर मैंने ले लिया है। उनको फोन कर उनके घर पर उनसे मिलूंगा। उनके जैसी दीर्घ और स्वस्थ जिंदगी कैसे पाई जाये, उसमें मेरी गहन रुचि है।

शायद आपकी भी हो! :-)


Published by Gyan Dutt Pandey

Exploring rural India with a curious lens and a calm heart. Once managed Indian Railways operations — now I study the rhythm of a village by the Ganges. Reverse-migrated to Vikrampur (Katka), Bhadohi, Uttar Pradesh. Writing at - gyandutt.com — reflections from a life “Beyond Seventy”. FB / Instagram / X : @gyandutt | FB Page : @gyanfb

10 thoughts on “मुराहू पंडित से दीर्घ जीवन के सूत्रों पर चर्चा”

  1. बहुत ही अच्छा लगता है आपको पढ़ना, भगवान आपको लंबी उम्र दे🙏😊

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  2. आपका प्रयोग बहुत भाया। बिटिया बहुत दिनों से कोंच रही है कि अपनी कविताओं का पाठ करके ब्लाग के साथ डालिये, सुनने में सुविधा होती है। अब शब्द चित्रों से पाठक को बाँधना कठिन हो चला है, मन कहीं टिकता ही नहीं। पुरानी परम्परा में जाना पड़ेगा, कथाकारी की।

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  3. बहुत ही सुन्दर साक्षात्कार किया है आपने श्री मुराहू पंडित जी का। अनुकरणीय जीवन गाथा है उनकी।

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