मेरे बाबा का समय


एक पोते की स्मृति और अपना ही भविष्य टटोलने की कोशिश। मैं छोटा था। चार साल का। बब्बा एक लाठी लिए, धोती-बंडी पहने स्कूल को निकलते थे। पास के गांव शम्भू के पूरा में प्राइमरी के हेड मास्टर थे। बच्चे बहुत डरते थे। बड़े भी उन्हें आते देख पगडंडी से नीचे उतर जाते थे। अपनेContinue reading “मेरे बाबा का समय”

The World Is Wrinkled — थॉमस फ्रीडमैन की पुस्तक पर सीक्वेल 


फ्रीडमैन ने दुनिया को वहाँ से देखा जहाँ नई सड़कें बन रही थीं। मैं उसे वहाँ से देख रहा हूँ जहाँ उन सड़कों पर चलते वाहनों ने पैदल चलने की ताकत घटा दी है। थॉमस फ्रीडमैन का ताजा लेख है न्यूयॉर्क टाइम्स में – Everybody Is a Loser in This Middle East War. वह लेखContinue reading “The World Is Wrinkled — थॉमस फ्रीडमैन की पुस्तक पर सीक्वेल “

मानसून ने चुपचाप हाजिरी लगा दी


पूरे जून भर बादल आते रहे, अनमने से। बरसने का उनका कोई इरादा नहीं था। भदोही जिले में तो जून के अंत तक लगभग 99 प्रतिशत वर्षा की कमी दर्ज हुई। धान की नर्सरियाँ प्रतीक्षा में सूखने लगी थीं और किसान आसमान को कुछ अधिक देर तक देखने लगे थे। मौसम विभाग के अनुमान हरContinue reading “मानसून ने चुपचाप हाजिरी लगा दी”

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