यह गांव अगर एक ‘औसत’ गांव भर ही हो कर रह गया और इसके ढेर सारे लोग बिना कुछ किये या सिर्फ ट्रक ड्राइवरी करते रह गये तो वह इस कारण से कि वे ‘बखरी’ के खासमखास होने के परावर्तित आभामण्डल में इतराते रहे।
Author Archives: Gyan Dutt Pandey
#गांवदेहात की सुबह – उमेश, इस्माइल और भगेलू
मैं गांव के सबर्बन रूपांतरण की कल्पना करता हूं। अगर प्रयाग-वाराणसी का वैसा विकास हुआ जैसा वडोदरा-अहमदाबाद का है तो उमेश की दुकान साणद की एक दुकान सरीखी होगी एक दशक में। कटका साणद जैसा सबर्ब बन जायेगा।
शांति, बद्री साधू और बंसी
बंसी कलकत्ता में सम्भवत: ड्राइवर थे। बंगाल में कहीं वे शांति के सम्पर्क में आये होंगे और उनसे विवाह कर अपने गांव वापस लौटे। गांव में उन्हे स्वीकार नहीं किया गया। तब बंसी के मामा, बद्री साधू ने उन्हें अपने यहां आश्रय दिया।
