कुल मिला कर सीन बड़ा ऑबसीन है। और कुछ समझ भी नहीं आता कि क्या किया जाये। अपने को बचाये रखना ही बड़ी प्राथमिकता है।
Author Archives: Gyan Dutt Pandey
वह टीका नहीं लगवाना चाहते
उनके जैसे बहुत से लोग जैसा चल रहा है चलने देना चाहते हैं। भले ही लस्टम पस्टम चले, पर लॉकडाउन न होने से नून-रोटी तो चल रही है। उनके जैसे बहुत से लोगों को कोरोना टीके को ले कर भ्रांतियां और पूर्वाग्रह हैं।
कबाड़ कलेक्शन केंद्र
गांव उतना जीवंत नहीं रहा, जितना कल्पना में था। पर फिर भी बेहतर है। बहरहाल कबाड़ बीनक बच्चे, कबाड़ी साइकिल वाले और कबाड़ कलेक्शन केंद्र भविष्य में बढ़ेंगे। अर्थव्यवस्था दहाई के अंक में आगे बढ़ेगी तो कबाड़ तो होगा ही!
