दुनियाँ मुटा रही है। मुटापे की विश्वमारी फैली है। लोग पैदल/साइकल से नहीं चल रहे। हमारा शरीर मुटापे से लड़ने के लिये नहीं, भुखमरी से लड़ने के लिये अभ्यस्त है। समाज भी मुटापे को गलत नहीं मानता। लम्बोदर हमारे प्रिय देव हैं!
Author Archives: Gyan Dutt Pandey
शाम 7 बजे ‘बोधई’ का बाटी चोखा
कुल मिला कर पूरी सेल्समैनी चाइना छाप माल बेचने में पारंगत है। सेल्समैन के गुणों के मोहजाल में स्वदेशी और राष्ट्रवाद से ओतप्रोत ग्राहक कड़क से मुलायम बनते हुये अंतत: चाइनीज पर टूटता है! आत्मनिर्भरता तेल लेने चली जाती है!
कुहासा – रीपोस्ट
मौसम कुहासे का है। शाम होते कुहरा पसर जाता है। गलन बढ़ जाती है। ट्रेनों के चालक एक एक सिगनल देखने को धीमे होने लगते हैं। उनकी गति आधी या चौथाई रह जाती है।
