भय विहीन हम


किसका भय है हमें? कौन मार सकता है? कौन हरा सकता है? कौन कर सकता है जलील? आभाजी के ब्लॉग पर दुष्यंत की गजल की पंक्तियां: पुराने पड़ गए डर, फेंक दो तुम भी ये कचरा आज बाहर फेंक दो तुम भी । मुझे सोचने का बहाना दे देती हैं। दैवीसम्पद की चर्चा करते हुयेContinue reading “भय विहीन हम”

वर्तमान पीढ़ी और ऊब


सृजन की प्रक्रिया धीमी और श्रमसाध्य होती है। और जो भी धीमा और श्रमसाध्य होता है उसमें ऊब होती है। पहले की पीढ़ियां ऊब को झेल कर भी कार्यरत रहने में सक्षम थीं। पर आजकल लोग ऊब से डरते हैं। नौजवानों को अकेलेपन से डर लगता है। उन्हें पुस्तकालय में समय काटना हो तो वेContinue reading “वर्तमान पीढ़ी और ऊब”

वह मर कर परिवार का भला कर गया


अल्लापुर मुहल्ले में मेरी रिश्ते की बहन रहती हैं। पन्द्रह वर्ष पहले उन्होने वहां मकान बनवाया था। काफी समय तक उनके यहां घर बनने का कामकाज चलता रहा था। हम लोग उस समय रतलाम में रहते थे और यदाकदा इलाहाबाद आते थे। मैं इलाहाबाद आने पर अपनी इन अल्लापुर वाली दीदी से मिलने जाया करतीContinue reading “वह मर कर परिवार का भला कर गया”

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