मैं विफलता-सफलता की बात कर रहा था। सत्यम की वेब साइट, जो अब बड़ी कठिनाई से खुल रही थी (बहुत से झांकने का यत्न कर रहे होंगे), के मुख्य पन्ने पर बने विज्ञापन में एक छवि यूं है: सफलता लक्ष्य/परिणाम पर सतत निगाह रखने का मसला है। काश सत्यम ने यह किया होता। सत्यम छापContinue reading “सत्यम सफलता”
Category Archives: आत्मविकास
विफलता का भय
विफलतायें अन्तत: सफलता में बदलती हैं। न बदलती होतीं तो लिंकन लिंकन न बन पाते। तब विफलताओं का भय क्यों लगता है? (मैं अपनी कहूं तो) एक भय तो शायद यह है कि पहले असफल होने पर लगता था कि आगे बहुत समय है सफल होने का, पर अब लगता है विफलता चिपक जायेगी। उसकेContinue reading “विफलता का भय”
भय और अज्ञान की उत्पादकता
पिछली पोस्ट पर कई टिप्पणियां भय के पक्ष में थीं। बालक को भय दिखा कर साधा जाता है। यह भी विचार व्यक्त किया गया कि विफलता का भय सफलता की ओर अग्रसर करता है – अर्थात वह पॉजिटिव मोटीवेटर है। पता नहीं। लगता तो है कि टिप्पणियों में दम है। भय से जड़ता दूर होतीContinue reading “भय और अज्ञान की उत्पादकता”
