“अजगर करे न चाकरी, पंछी करे न काम। दास मलूका कह गये, सबके दाता राम॥” दास मलूका को देखा नहीं, वर्ना यह कामना उनसे करता कि राम जी की कृपा दिला कर परमानेण्ट पेंशन की व्यवस्था करा दें। कोल्हू के बैल की तरह न खटना पड़े। डा. अमर कुमार को यह कष्ट है कि कैसेContinue reading “कोल्हू का बैल बनाम मैं”
Category Archives: आत्मविकास
ब्लॉग अभिव्यक्ति का कम; रूपांतरण का माध्यम अधिक होना चाहिये
आप रोज ३०-४० ब्लॉग पढ़ते हैं। उनमें से पचास फीसदी पर तो टिप्पणी करते हैं ही। रोज आप को ऐसा कम ही मिलता है कि ब्लॉगर रूपांतरित हो रहे हों। एक ब्लॉगर संवेदनशील कवि है, तो वह उसी संवेदना की कवितायें ठेलता जाता है। फुरसतिया समय की कमी के बावजूद रूपांतरित नहीं होते। उनके दिमागContinue reading “ब्लॉग अभिव्यक्ति का कम; रूपांतरण का माध्यम अधिक होना चाहिये”
पोरस का राजोचित आत्मविश्वास
बहुत बार पढ़ा है कि हारने के बाद पोरस को सिकन्दर के सामने जंजीरों में जकड़ कर प्रस्तुत किया गया। उस समय सिकन्दर ने प्रश्न किया कि तुम्हारे साथ कैसा व्यवहार किया जाये? और पोरस ने निर्भीकता से उत्तर दिया – “वैसा ही, जैसा एक राजा दूसरे राजा के साथ करता है।” यह नेतृत्व कीContinue reading “पोरस का राजोचित आत्मविश्वास”
