रेगुलरहा सुकुल ने दिया फेयरवेल


एक लम्बी कद-काठी के साठ वर्ष से अधिक उम्र के व्यक्ति को गोरखपुर की रेलवे कॉलोनी में रोज सवेरे शाम घूमते देखता था। एक ही चाल से। हर मौसम में। कड़ाके की ठण्ड में भी। कोहरा इतना घना होता था कि तीन चार मीटर से ज्यादा दिखाई न दे। मैं अपने गोलू पाण्डेय (मेरा दिवंगतContinue reading “रेगुलरहा सुकुल ने दिया फेयरवेल”

मॉथ मनोवृत्ति वाला प्रबन्धन


मै‍, अपनी दैनिक ड्यूटी के तहद अपने महाप्रबन्धक महोदय के पास सवेरे साढ़े दस बजे जाता हूं। वहां रोज की मालगाड़ी परिवहन पर रिव्यू होता है और कुछ सामान्य बातचीत। शुक्रवार को मैने चलते चलते कहा – “हम आज लदान के लिये एक बीटीपीएन रेक (नेफ्था/पेट्रोल/डीजल के लदान के ४८ टैंक वैगन की मालगाड़ी) बढ़ानेContinue reading “मॉथ मनोवृत्ति वाला प्रबन्धन”

एचटीएमएल की रेल-पटरी और नौ-दो-ग्यारह!


आलोक 9-2-11 के पोस्ट के हेडिंग और विषयवस्तु बड़े सिर खुजाऊ होते हैं। और जब तक आप समझ पायें, वे नौ-दो-ग्यारह हो जाते हैं। पहले वे बोले कि उनके चिठ्ठे का एचटीएमएल अवैध है। फिर वे इतराये कि वे शुद्ध हो गये हैं। पर लोगों की टिप्पणियों का ब्लॉग पर संसर्ग उनके ब्लॉग के गुणसूत्रContinue reading “एचटीएमएल की रेल-पटरी और नौ-दो-ग्यारह!”

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