प्रधान, पोखरा, ग्रीस और पुर्तगाल


मैं पिछले महीने में प्रधान जी से कई बार बात करने का यत्न कर चुका। हर बार पता चलता है कि पोखरा (तालाब) खुदा रहे हैं। लगता है नरेगा की स्कीम उनका बहुत समय ले ले रही है। सरकार बहुत खर्च कर रही है। पैसा कहीं से आ रहा होगा। हर वैसी स्कीम जो कमContinue reading “प्रधान, पोखरा, ग्रीस और पुर्तगाल”

हरी ऊर्जा क्रान्ति, भारत और चीन


बाजू में मैने मेकेंजी क्वाटर्ली (McKinsey Quarterly)  की लेखों की विजेट लगा रखी है। पता नहीं आप में से कितने उसे देख कर उसके लेखों को पढ़ते हैं। मैं बहुधा उसके लेखों को हार्ड कापी में निकाल कर फुर्सत से पढ़ता हूं। इसमें भारत और चीन विषयक लेख भी होते हैं। भारत प्रगति कर रहाContinue reading “हरी ऊर्जा क्रान्ति, भारत और चीन”

फेरीवाले


बहुत से आते हैं। बहुत प्रकार की चीजों को बेचते। विविध आवाजें। कई बार एक बार में सौदा नहीं पटता तो पलटकर आते हैं। वे चीजें बेचना चाहते हैं और लोग खरीदना। जबरदस्त कम्पीटीटिव सिनर्जी है कि कौन कितने मुनाफे में बेच सकता है और कौन कितने कम में खरीद सकता है। विन-विन सिचयुयेशन भीContinue reading “फेरीवाले”

Design a site like this with WordPress.com
Get started