कौन चाहता है इलेक्टॉनिफिकेशन ?


इन्जीनियरिंग की अस्सी प्रतिशत पढ़ाई मैने स्लाइडरूल और लॉगरिथ्मिक टेबल की सहायता से की गई गणना से पार की थी। पढ़ाई के चौथे और पांचवें साल में कैल्क्युलेटर नजर आने लगे थे। जब मैने नौकरी करना प्रारम्भ किया था, तब इलेक्टॉनिक टाइपराइटर भी इक्का-दुक्का ही आ रहे थे। मुझे याद है कि उस समय मैनेContinue reading “कौन चाहता है इलेक्टॉनिफिकेशन ?”

हुन्दै ले लो हुन्दै!


हुन्दै वालों ने तम्बू तान लिया है हमारे दफ्तर के बाहर। दो ठो कार भी खड़ी कर ली हैं। हमारे दफ्तर के बाबूगण कार खरीदने में जुट गये हैं। ई.एम.आई. है तीन हजार सात सौ रुपये महीना। सड़क का ये हाल है कि हाईकोर्ट के पास जाम लगा है। आधा घण्टा अंगूठा चूस कर दफ्तरContinue reading “हुन्दै ले लो हुन्दै!”

क्या “लेफ्ट”, “राइट” नहीं है?


मैं घर से बाहर जा रहा था। मेरे दायें हाथ में ब्रीफ केस था। अचानक याद आया कि मैने पर्स नहीं लिया है। मैने हमेशा की तरह जोर से बोला – पर्स देना। मेरी ३४ साल की निष्ठा से बंधी पत्नी तेजी से बेडरूम की तरफ गयीं और पर्स ले आयीं। श्री जी विश्वनाथ औरContinue reading “क्या “लेफ्ट”, “राइट” नहीं है?”

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