एक साहबी आत्मा (?) के प्रलाप


मानसिक हलचल एक ब्राउन साहबी आत्मा का प्रलाप है। जिसे आधारभूत वास्तविकतायें ज्ञात नहीं। जिसकी इच्छायें बटन दबाते पूर्ण होती हैं। जिसे अगले दिन, महीने, साल, दशक या शेष जीवन की फिक्र करने की जरूरत नहीं। इस आकलन पर मैं आहत होता हूं। क्या ऐसा है? नोट – यह पोस्ट मेरी पिछली पोस्ट के संदर्भContinue reading “एक साहबी आत्मा (?) के प्रलाप”

समसाद मियां – अथ सीक्वलोख्यान


हीरालाल नामक चरित्र, जो गंगा के किनारे स्ट्रेटेजिक लोकेशन बना नारियल पकड़ रहे थे, को पढ़ कर श्री सतीश पंचम ने अपने गांव के समसाद मियां का आख्यान ई-मेला है। और हीरालाल के सीक्वल (Sequel) समसाद मियां बहुत ही पठनीय चरित्र हैं। श्री सतीश पंचम की कलम उस चरित से बहुत जस्टिस करती लगती है।Continue reading “समसाद मियां – अथ सीक्वलोख्यान”

शिक्षा व्यवस्था


कुछ वर्ष पहले नालन्दा के खण्डहर देखे थे, मन में पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता के भाव जगे। तक्षशिला आक्रमणकारियों के घात न सह पाया और मात्र स्मृतियों में है। गुरुकुल केवल “कांगड़ी चाय” के विज्ञापन से जीवित है। आईआईटी, आईआईएम और ऐम्स जैसे संस्थान आज भी हमें उत्कृष्टता व शीर्षत्व का अभिमान व आभास देतेContinue reading “शिक्षा व्यवस्था”

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