संभव है कि नागपुर पहुँचते-पहुँचते मैं यह तय कर पाऊँ कि कौन ज़्यादा संतुलित जीवन जी रहा है—
मुन्ना पांडे या मैं। मैं आईने में खुद को निहारता हूं। पर शायद मैं खुद को नहीं, मुन्ना पांडे सरीखे को देखना चाहता हूं।
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आवअ तनी अरटियावा जाये गुरू!
मैने कोविड के दौरान चीनी महिला फैंग फैंग की वूहान डायरी पढ़ी। उसमें वे आपसी संवाद के लिये वीचैट की चर्चा जब तब करती हैं। वीचैट बहुधा उनकी चैट मॉडरेट कर उतार दिया करता था। पर फिर भी मुझे लगता था कि चीन के पास अपना चैट एप्प है और भारत के पास नहीं। उसमेंContinue reading “आवअ तनी अरटियावा जाये गुरू!”
मिलीपीड्स का मतिभ्रम
मैने पिछले महीने मिलीपीड्स या भुआलिन पर लिखा था। ये नम वातावरण के जीव हैं। बरसात में निकलते और ब्रीडिंग करते हैं। बरसात खत्म होते समय ये वापस नमी तलाशते मिट्टी में घुस जाते हैं। पिछले सप्ताह बरसात खत्म हो गई थी। आईएमडी ने भी मानसून वापसी की घोषणा कर दी थी। ये मिलीपीड्स हमारेContinue reading “मिलीपीड्स का मतिभ्रम”
