मिश्रीलाल सोनकर, सतयुग वाले


कहते हैं भारत ऐसा देश है जो एक साथ बीस शतब्दियों में जीता है। उस हिसाब से यह कल्पना की जा सकती है कि एक अच्छी खासी आबादी सतयुग, त्रेता, द्वापर की भी अभी होगी। मिश्रीलाल की तरह अपने सतयुगी नोश्टॉल्जिया में जीती।

Magzter पर समाचार पत्र पत्रिकायें


सवेरे उठने पर पहला काम होता है अखबार डाउनलोड करने का। सबसे पहले बिजनेस स्टेण्डर्ड का नया अंक आता है। अंगरेजी और हिंदी दोनो का। उसके आसपास ही फाइनेंशियल एक्सप्रेस। फिर आते हैं अन्य अखबार – इण्डियन एक्स्प्रेस, टाइम्स ऑफ इण्डिया, गार्डियन, जनसत्ता, जागरण आदि और भी। पत्रिकाओं में लगभग दो दर्जन मिल जाती हैं।Continue reading “Magzter पर समाचार पत्र पत्रिकायें”

धूप खिली है और लॉन में जगह जमा ली है!


पत्नीजी ने कमरे में लैपटॉप, बिस्तर और रज़ाई के कंफर्ट जोन से भगा दिया है। बताया है कि आज अलाव की भी जरूरत नहीं। आज लॉन में कुर्सियां लगा दी हैं। धूप अच्छी है। आसमान साफ है। वहीं बैठो। कमरा बुहारने दो! और सच में आज लॉन शानदार लग रहा है। कार्पेट घास का आनंदContinue reading “धूप खिली है और लॉन में जगह जमा ली है!”

ठण्ड बढ़ी है। आज कोहरे की दस्तक हुई है।


आज सवा छ बजे घर का गेट खोलने बाहर निकला तो पाया कोहरे की शुरुआत हो गयी है। अब दिनचर्या बदलेगी। सवेरे सात बजे साइकिल ले कर निकलने की बजाय अब नौ या दस बजे निकलना होगा। लेकिन साइकिल चलाते रहो ज्ञानदत्त जी। शारीरिक और मानसिक दोनो फिटनेस का मूल साइकिल में ही है। जिसContinue reading “ठण्ड बढ़ी है। आज कोहरे की दस्तक हुई है।”