डेढ़ी – डेढ़ किलोमीटर लम्बी गांव की सड़क


वह व्यक्ति नहीं है, गाय गोरू भी नहीं है। वह गांव की सड़क है। उसके एक ओर रेलवे लाइन है। अगर लाइन का अवरोध न होता तो वह नेशनल हाईवे-19 तक जाती। दूसरी ओर द्वारिकापुर गांव है जो गंगा नदी के तीर पर है। कुल मिला कर यह सड़क, डेढ़ी, रेलवे लाइन और गंगा नदीContinue reading “डेढ़ी – डेढ़ किलोमीटर लम्बी गांव की सड़क”

डाक्टर पासी के बैल


वह अपने बैलों के साथ आ रहा था। दोनों बैलों की जोड़ी। काला और सफ़ेद। उनके ऊपर जुआ रखा था। आजकल के ट्रेक्टरहे युग में यह दृष्य असामान्य था। पहले तो मैने उसका चित्र लिया; फिर अपनी साइकिल रोक दी। कहां जा रहे हो, ये बैल ले कर?  खेत जोतने। अपना खेत। दो ढाई बीघाContinue reading “डाक्टर पासी के बैल”

दण्डीस्वामी डा. विद्यानन्द सरस्वती – गुन्नीलाल पाण्डेय के गुरु जी – से मुलाकात


कल अगियाबीर का गंगातट देखने के बाद हम (राजन भाई और मैं) गुन्नीलाल पाण्डेय जी के घर पंहुचे। गुन्नी रिटायर्ड स्कूल अध्यापक हैं। सम्भवत: प्राइमरी स्कूल से। मेरी ही उम्र के होंगे। एक आध साल बड़े। गांव के हिसाब से उनकी रुचियाँ परिष्कृत हैं। बड़ा साफ सुथरा घर। तरतीब से लगाई गयी वनस्पति। चुन करContinue reading “दण्डीस्वामी डा. विद्यानन्द सरस्वती – गुन्नीलाल पाण्डेय के गुरु जी – से मुलाकात”

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