शिवकुटी, नारायणी आश्रम और राणा का इतिहास खण्ड


मैने कभी नहीं सोचा कि मैं इतिहास पर लिखूंगा। स्कूल के समय के बाद इतिहास बतौर एक डिसिप्लिन कभी देखा-पढ़ा नहीं। पर यहां इलाहाबाद के जिस शिवकुटी क्षेत्र में रहता हूं – गंगा के तट पर कोई चार-पांच सौ एकड़ का इलाका; वहां मुझे लगता है कि बहुत इतिहास बिखरा पड़ा है। बहुत कुछ कोContinue reading “शिवकुटी, नारायणी आश्रम और राणा का इतिहास खण्ड”

डिसऑनेस्टतम समय


सुना है कि यह भारत में डिसऑनेस्टतम समय है। कभी कहा जाता था कि भारत को चंगेज खान ने लूटा, तैमूर लंग ने लूटा, अब्दाली ने लूटा, अंग्रेजों ने लूटा। अब लूटने का नम्बर भारतीय लूट-एलीट का है। आये दिन नये नये नाम आ रहे हैं। इनके सामने चंगेज/तैमूर/अब्दाली/अंग्रेज पिद्दी नजर आते हैं। मुंह पिटाऊ।Continue reading “डिसऑनेस्टतम समय”

बुढ़िया चपरासी – द्रौपदी और मेरी आजी


पिछली पोस्ट में मैने अपने दफ्तर की एक बुढ़िया चपरासी के बारे में लिखा था। आप लोगों ने कहा था कि मैं उससे बात कर देखूं। मैने अपनी झिझक दूर कर ही ली। कॉरीडोर में उसको रोक उसका नाम पूछा। उसे अपेक्षा नहीं थी कि मैं उससे बात करूंगा। मैं सहज हुआ, वह असहज होContinue reading “बुढ़िया चपरासी – द्रौपदी और मेरी आजी”

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