चकरी से दाल दलने का उपक्रम


खेती की रहर (अरहर) थोड़ी सी मिली। एक बोरी। उसको दलवाने के लिये पत्नीजी ने दो महिलाओं को बुलाया। एक दिन उन्होने एक राउण्ड चकरी चला कर उसके टुकड़े किये। दूसरी मंजिल पर उन्होने डेरा जमाया था। चकरी चलने की आवाज गड़गड़ाती हुई दिन भर आती रही मानो आसमान में मेघ गड़गड़ा रहे हों। दालContinue reading “चकरी से दाल दलने का उपक्रम”

पुराने कपड़ों से रजाई बनाने वाले


<<< पुराने कपड़ों से रजाई बनाने वाले >>> घर के बगल की महुआरी में आये हैं पुराने कपड़े से रजाई-गद्दे बनाने वाले। तीन दिन से डेरा किया है। मेरी पत्नीजी की सहायिका अरुणा अपने इक्कीस किलो पुराने कपड़ों से तीन रजाइयां बनवा लाई है। उसने हमें बताया तो हम (पत्नीजी और मैं) देखने गये। महुआरीContinue reading “पुराने कपड़ों से रजाई बनाने वाले”

रामसेवक


<<< रामसेवक >>> रामसेवक मेरे पड़ोसी हैं और मेरे बगीचे की देखभाल करने वाले भी। उनके ऊपर मेरे ब्लॉग पर अनेक पोस्टें हैं। कभी कभी मुझे लगता है कि चरित्रों के बारे में लिखे का संकलन करूं, तो उसके अनुसार रामसेवक पर ही एक छोटी मोटी पुस्तक बन जायेगी। य्स दिन सवेरे जब हम अपनाContinue reading “रामसेवक”

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