सूखे पत्ते बीनते बच्चे


सूखे पत्ते जैसी तुच्छ वस्तु, जिसका कोई मोल नहीं लगाता और जो कूड़ा-करकट की श्रेणी में आती है, किसी को इतनी प्रसन्नता दे सकती है?! गरीबी की प्रसन्नता!

राजमणि राय और उम्र का एकाकीपन


उनकी बातों से लगा कि वे मेरी सिम्पैथी चाहते हैं पर अकेले जीने में बहुत बेचारगी का भाव नहीं है। राजमणि ने अकेले जिंदगी गुजारने के कुछ सार्थक सूत्र जरूर खोज-बुन लिये होंगे। इन सज्जन से भविष्य में मिलना कुछ न कुछ सीखने को देगा।

गेंहू की तलाश में ढूंढी यादव


आजकल गेंहू की राशन में उपलब्धता की मारामारी है। ज्यादातर लोगों को चावल ही मिल रहा है फ्री वाले राशन में। अगर सरकार गेंहू रिलीज भी कर रही है राशन में तो उसे कोटेदार लोग बाजार में बेंच कर उसके बदले चावल ही दे रहे हैं जनता को।

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