माँ की याद आती ही है, आंसू टपकते हैं – प्रेमसागर


23 नवम्बर, रात्रि –

सोलह साल का प्रेमसागर, जिसे यह कोई अंदाज नहीं था कि द्वादश ज्योतिर्लिंग की कांवर यात्रा कितनी दुरूह होती है; अपनी मरणासन्न माँ की जिंदगी के लिये किसी महिला के कहने पर संकल्प कर बैठता है कि अगर माँ बच गयी हो वह यह कांवर यात्रा करेगा। और चमत्कार होता है, माँ बच जाती हैं। अठाईस साल और जीती हैं।

वह संकल्प बचा रहता है। प्रेम सागर की उम्र सैंतालीस साल की होती है पर संकल्प धुंधला नहीं पड़ता। प्रेमसागर को लगता है कि आगे शरीर क्षीण पड़ेगा और यह संकल्प पूरा करना दुरूहतर होता जायेगा। वह व्यक्ति संगम से कांवर ले कर निकल देता है बाबा विश्वनाथ के लिये। फिर विश्वनाथ महादेव से अमरकण्टक; आगे उज्जैन, ॐकारेश्वर और अब सोमनाथ की ओर अग्रसर।

उसकी शरीर की रिजर्व ऊर्जा छीज रही है। एक एक कदम रखना भारी पड़ रहा है। पर वह चलता जा रहा है। आज वह 28-30 किमी चला है। नक्शे से लगता है कि वह सौराष्ट्र में घुस गया है। दूर दूर तक बबूल के झाड़ नजर आते हैं। ऊसर, बंजर जमीन। खेती कम। रास्ते में मुश्किल से आठ दस छायादार वृक्ष दिखे होंगे। पानी साथ लिये है। सो वैसी कोई दिक्कत नहीं। सवेरे साढ़े चार बजे अंधेरे में गलियाना से निकले प्रेमसागर बारह बजे तक बीस किलोमीटर की दूरी नाप लेते हैं। उसके बाद सूरज का ताप बढ़ने पर एक जगह आराम के लिये रुकते हैं तो तीन बजे तक आराम करते हैं। उसके बाद चलना शुरू करते हैं, पर गर्मी, थकान और ऊर्जा की कमी से चलना दूभर होता है। “करीब आठ किलोमीटर चलने में भईया तीन घण्टे से ज्यादा लगा; जबकि इतनी दूरी मैं सवा-डेढ़ घण्टे में नाप लिया करता था।”

दूर दूर तक बबूल के झाड़ नजर आते हैं। ऊसर, बंजर जमीन। खेती कम।

कुछ न कुछ गलत है – ज्यादा ही दिक्कत है। प्रेमसागर उसे स्वीकार नहीं कर रहे थे अब तक। जिद्दी और जड़ मति संकल्प पूरा करने के लिये धुन में रमा व्यक्ति। अब उन्हें समझ मेंं आ रहा है। … सुधीर पाण्डेय मुझे कहते हैं – यह व्यक्ति आत्मघाती जुनून के वश में है। इसका हीमोग्लोबीन जरूर घट गया होगा। बाकी जरूरी तत्व भी चुक गये होंगे। इसे डाक्टर की सलाह और सप्लीमेण्टस की जरूरत है। कुछ दिन का आराम भी होना चाहिये। जीवन रहेगा, तभी तो यात्रा कर पायेगा।”

मैं भी प्रेमसागर को यह कहता रहा हूं, पर वे सुनते नहीं थे – “भईया मैं पूरा इंतजाम से चल रहा हूं। बबूल का गोंद रात में भिगो कर सवेरे उसका सेवन करता हूं।” … इसी तरह के सेल्फ मेडीकेशन वाले नुस्खे वे मुझे बताते रहे और मुझे भी मेरी ऑस्टियोअर्थराइटिस के लिये सलाह देते रहे। पर पिछले दो दिनों से डाक्टर को दिखाने की सलाह पर रिसेप्टिव हुये हैं। उन्हें भी समझ आ गया है कि कहीं उनके साथ कुछ गड़बड़ है जरूर।

भोगावो नदी

यहां, जहां आज शाम पंहुचे, वह स्थान नक्शे में कमियाला दिखती है। भोगावो नदी पार करने के बाद। यहांंसे धंधुका 28 किलोमीटर दूर है। अश्विन पण्ड्या जी ने कहा है कि वहां रेलवे स्टेशन पर स्टेशन अधीक्षक (स्तेधी) महोदय तैयार हो गये हैं अपने यहां उन्हें “जितना जरूरी हो उतने दिन” रखने के लिये। स्टेधी साहब अश्विन जी के पुराने सब-ऑर्डीनेट रह चुके हैं और उनके प्रति बहुत आदर करते हैं। धंधुका रेल स्टेशन अभी गेज कंवर्शन में बंद है तो स्तेधी महोदय के पास काम भी ज्यादा नहीं है। दिन में एक दो इंजन भर आते होंगे ट्रेक रोलिंग के लिये। वे भी प्रेमसागर को पूरी तवज्जो दे सकेंगे। वे तो प्रेमसागर को चार दिन रुकने की बात कहते हैं, पर मेरे विचार से वहां प्रेमसागर को जरूरत हो तो ज्यादा भी रुक कर स्वास्थ्य लाभ करना चाहिये। धंधुका में प्रेमसागर स्वास्थ लाभ करें और स्टेशन अधीक्षक महोदय पुण्य लाभ। दोनो नफे में रहेंगे। अश्विन जी बताते हैं कि स्टेशन अधीक्षक महोदय स्वयम काफी धार्मिक वृत्ति के व्यक्ति हैं।

कमियाला में जहां प्रेमसागर रुके हैं, वहां कोई हनुमान मंदिर है। मंदिर तो अच्छा दिखता है चित्र में। उसमें कोई धर्मशाला नहीं है। नये जमाने की टीन की छत है और उसके नीचे पंखा है। मच्छर नहीं लगेंगे। भोजन का अच्छा प्रबंध कर दिया है मंदिर समिति वालों ने। एक तख्त है जिसपर प्रेमसागर ने अपनी चादर बिछा ली है। अपनी कांवर सिरहाने रखी है और अपने बैग का सिरहाना बना लिया है। “रात गुजारनी है भईया। सवेरे जल्दी निकल लूंगा – चार साढ़े चार बजे। बारह बजे तक जितना चल सका चलूंगा। उसके बाद नहीं चला जायेगा।”

मैं भी उन्हें सलाह देता हूं कि धंधुका की 28 किमी की यात्रा वे एक दिन में करने की बजाय दो दिन में करें। दूसरे दिन दोपहर से पहले वे धंधुका पंहुच जायें। कल बारह बजे तक जो उपयुक्त जगह मिले वहां दोपहर के बाद रात गुजारने की चेष्ठा करें।… देखें वे क्या करते हैं।

मैं उनसे पूछता हूं – घर वालों से बात होती है?

“हां हां। दिन में दो तीन बार उनका फोन आ जाता है। ज्यादातर यही पूछ्ते हैं कि अभी और कितना दिन लगेगा यात्रा में। पिताजी से भी बात होती है। वे तो रोने लगते हैं।”

जिनके लिये इतना कठिन संकल्प लिया, उनकी याद आती है? – मेरा यह प्रश्न सुन कर प्रेमसागर की आवाज बदल जाती है। लगता है कि कुछ गले में फंस रहा हो – “भईया अकेला चलता हूं तो उनका याद, माँ का याद, बना ही रहता है। हर समय आंखों के सामने उनकी तस्वीर आती है। आंसू टपकने लगते हैं। बस मैं मोबाइल पर भजन लगा देता हूं और सुनता चलता हूं…।”

इस बारे में मैं आगे और बात नहीं करता। संकल्प का संवेदनशील विषय लम्बा बतियाने की मेरी क्षमता नहीं है। मुझे अपनी माता और पिता के साथ उनके अंतिम दोनों में बिताये दिन याद आने लगते हैं। कैसे मैं इस जद्दोजहद से गुजरा हूं कि उनकी जिंदगी कुछ और चल जाती… माता पिता की बात बहुत इमोशनल नब्ज है।

“भईया मुझसे जो भी लोग मिलते हैं; मैं उन्हे यही कहता हूं कि अपने माता पिता की सेवा करो। जितना भी दम खम हो। उससे बड़ी भगवान की सेवा कोई दूसरी नहीं।” – प्रेमसागर जोड़ते हैं।

मैं आगे बात नहीं चलाता। रात के आठ बजे हैं। प्रेमसागर को जल्दी सो जाना चाहिये और कल सुबह भोर में ही यात्रा शुरू कर जितना हो सके उतनी दूरी तय कर लेनी चाहिये। अभी धंधुका पंहुच स्वास्थ्य लाभ उनका ध्येय होना चाहिये; सोमनाथ और बाकी ज्योतिर्लिंग तो बाद में होंगे। शरीर की सेवा होगी तो शरीर ही वाहन होगा संकल्प सिद्धि के लिये।

जय बजरंग बली! हर हर महादेव!

*** द्वादश ज्योतिर्लिंग कांवर पदयात्रा पोस्टों की सूची ***
पदयात्रा के प्रथम चरण में प्रयाग से अमरकण्टक; द्वितीय चरण में अमरकण्टक से उज्जैन और तृतीय चरण में उज्जैन से सोमनाथ की यात्रा है। उन पोस्टों की सूची इस पेज पर दी गयी है।
यात्रा की निकट भूतकाल की कुछ पोस्टें –
66. प्रेमसागर, गुजरात, छोटा उदयपुर और पालिया
67. छोटा उदयपुर से आगे, पालिया, बोडेली
68. प्रेमसागर – बोडेली से डभोई
69. प्रेमसागर – यात्रा की प्रकृति बदल गयी है
70. प्रेमसागर – तारापुर से गलियाना, गुजरात में
71. माँ की याद आती ही है, आंसू टपकते हैं – प्रेमसागर
72. धंधुका – कांवर यात्रा में पड़ा दूसरा रेल स्टेशन
द्वादश ज्योतिर्लिंग कांवर पदयात्रा पोस्टों की सूची
प्रेमसागर पाण्डेय द्वारा द्वादश ज्योतिर्लिंग कांवर यात्रा में तय की गयी दूरी
(गूगल मैप से निकली दूरी में अनुमानत: 7% जोडा गया है, जो उन्होने यात्रा मार्ग से इतर चला होगा) –
प्रयाग-वाराणसी-औराई-रीवा-शहडोल-अमरकण्टक-जबलपुर-गाडरवारा-उदयपुरा-बरेली-भोजपुर-भोपाल-आष्टा-देवास-उज्जैन-इंदौर-चोरल-ॐकारेश्वर-बड़वाह-माहेश्वर-अलीराजपुर-छोटा उदयपुर-वडोदरा-बोरसद-धंधुका
2098 किलोमीटर
प्रेमसागर की यात्रा के लिये अंशदान करना चाहें तो उनका UPI Address है – prem12shiv@sbi
प्रेमसागर यात्रा किलोमीटर काउण्टर

प्रेमसागर – तारापुर से गलियाना, गुजरात में


22 नवम्बर 21, रात्रि –

तारापुर और गलियाना दोनो छोटी जगहें हैं। गांव ही कहे जा सकते हैं। गलियाना गूगल मैप में जहां दिखाता है वहां से दो किमी आगे साबरमती नदी पार कर नदी के पास ही कोई श्रीकृष्ण मंदिर है। उसकी धर्मशाला में रुके हैं प्रेमसागर। नक्शे के हिसाब से कुल पच्चीस किमी चलना हुआ। पुराने उनकी यात्रा मानकों से यह छोटी यात्रा कही जायेगी पर वे सवेरे छ-सवा छ बजे निकले थे और शाम सात बजे मुकाम पर पंहुचे।

रास्ते में लोग उनकी कांवर पदयात्रा देख कर सहायता करने में पीछे नहीं रहे। सवेरे चाय की दुकान पर चाय वाले सज्जन – सीताराम बाबा जी ने बुला कर चाय पिलाई और पैसे नहीं लिये। एक जगह कालू भाई और गिरीश भाई ने उन्हें रोक कर उन्हें चीकू और केले खिलाये। दोपहर में एक होटल में भोजन के लिये रुके और भोजन के बाद होटल वाले सज्जन ने भी इनसे पैसे नहीं लिये।

धान के पुआल का संग्रह
धान की कटाई में लगे किसान

प्रेमसागर के अनुसार उनकी यात्रा का इलाके में वहां केले की बागवानी थी पर खेती में धान मुख्य दिखा। वह अब कट रहा है और खेत खाली होते दिख रहे हैं। उन्हें कालू भाई-गिरीश भाई ने चीकू खिलाये तो शायद किसान चीकू का हॉर्टीकल्चर भी करते हों।

कालू भाई-गिरीश भाई ने चीकू खिलाये

प्रेमसागर ने बताया कि दोपहर में धूप बहुत थी और असहनीय गर्मी थी। उस जगह से उनका मुकाम मात्र आठ साढ़े आठ किलोमीटर था, पर वे शाम पांच बजे तक उस होटल में ही आराम करते रहे। शाम पांच बजे ही निकल सके। सात बजे उनसे बात की तो वे साबरमती नदी पार कर मुकाम पर पंहुच ही रहे थे।

अश्विन पण्ड्या

मुझे थोड़ा अजीब लगा कि पचीस किमी की यात्रा में तेरह घण्टे लगे। सामान्यत: वे इतनी दूरी पर 8-9 घण्टे में पंहुच जाते थे। मैंने अश्विन पण्ड्या जी से भावनगर बात की। उन्होने बताया कि आगे धंधुका में उनकी व्यवस्था कर दी है उन्होने। वह भावनगर रेल मण्डल का रेलवे स्टेशन है जो आजकल आमान परिवर्तन (gauge conversion) के लिये बंद है। वहां स्टेशन के आवास खाली पड़े हैं। उन्ही में प्रेमसागर तीन-चार दिन रह सकते हैं। वहां स्टेशन मास्टर साहब उनके भोजन की भी व्यवस्था कर देंगे। जगह भावनगर से सौ किमी दूर है तो पण्ड्याजी खुद जा कर उनका हालचाल पता कर लेंगे। उनका कोरोना टीकाकरण भी हो जायेगा और जरूरत पड़ने पर जनरल चेक अप भी। पर धंधुका प्रेमसागर के इस साबरमती नदी तट के मुकाम से 56 किमी दूर है। वहां वे दो दिन में पंहुचेंगे।

रास्ते में यह एक ग्रमीण दम्पति का चित्र प्रेमसागर ने भेजा

“साबरमती नदी में जल बहुत था भईया, पर अंधेरा होने लगा था, इसलिये चित्र नहीं ले पाया; कल सवेरे ले कर भेज दूंगा।” – प्रेमसागर ने कहा। रात आठ बजे उन्होने मुझे फोन कर बताया कि श्रीकृष्ण मंदिर की धर्मशाला में ही भोजन व्यवस्था थी। भोजन में रोटी सब्जी और दूध था। सादा भोजन जो प्रेमसागर को रुचता भी है। भोजन कर वे सोने जा रहे हैं। अपना फोन भी साइलेण्ट मोड में रखेंगे। दिन में गर्मी ज्यादा लगी। थकान हो गयी है। नवम्बर के उत्तरार्ध में गर्मी थोड़ा अजीब लगा मुझे सुन कर पर पण्ड्या जी ने बताया कि यह इलाका सौराष्ट्र की सीमा पर है और अरब सागर की गतिविधियों के कारण गर्मी जरूर है। शायद उमस भी हो। यहां प्रयाग-भदोही-वाराणसी के मौसम से उसका अंदाज लगाना मेरे लिये कठिन है।

कल सवेरे प्रेमसागर को आगे निकलना है। दो दिन में धंधुका पंहुचना है तो उन्हे 25-30 किमी पर कोई रुकने का स्थान तलाशना होगा। पण्ड्या जी के अनुसार इलाका बहुत अच्छा है। लोग अच्छे हैं और रास्ते में बहुत मंदिर हैं जिनमें धर्मशालायें भी हैं। व्यवस्था ऐसी हैं रास्ते में कि लोग उनका प्रयोग शादियों-समारोहों के लिये किराये पर लेने का काम भी करते हैं। प्रेमसागर को उचित-उपयुक्त जगह मिलने में कोई दिक्कत नहीं होगी। आगे की यात्रा शुभ हो।

उमापति महादेव की जय। हर हर महादेव!

*** द्वादश ज्योतिर्लिंग कांवर पदयात्रा पोस्टों की सूची ***
पदयात्रा के प्रथम चरण में प्रयाग से अमरकण्टक; द्वितीय चरण में अमरकण्टक से उज्जैन और तृतीय चरण में उज्जैन से सोमनाथ की यात्रा है। उन पोस्टों की सूची इस पेज पर दी गयी है।
यात्रा की निकट भूतकाल की कुछ पोस्टें –
66. प्रेमसागर, गुजरात, छोटा उदयपुर और पालिया
67. छोटा उदयपुर से आगे, पालिया, बोडेली
68. प्रेमसागर – बोडेली से डभोई
69. प्रेमसागर – यात्रा की प्रकृति बदल गयी है
70. प्रेमसागर – तारापुर से गलियाना, गुजरात में
71. माँ की याद आती ही है, आंसू टपकते हैं – प्रेमसागर
72. धंधुका – कांवर यात्रा में पड़ा दूसरा रेल स्टेशन
द्वादश ज्योतिर्लिंग कांवर पदयात्रा पोस्टों की सूची
प्रेमसागर पाण्डेय द्वारा द्वादश ज्योतिर्लिंग कांवर यात्रा में तय की गयी दूरी
(गूगल मैप से निकली दूरी में अनुमानत: 7% जोडा गया है, जो उन्होने यात्रा मार्ग से इतर चला होगा) –
प्रयाग-वाराणसी-औराई-रीवा-शहडोल-अमरकण्टक-जबलपुर-गाडरवारा-उदयपुरा-बरेली-भोजपुर-भोपाल-आष्टा-देवास-उज्जैन-इंदौर-चोरल-ॐकारेश्वर-बड़वाह-माहेश्वर-अलीराजपुर-छोटा उदयपुर-वडोदरा-बोरसद-धंधुका
2098 किलोमीटर
प्रेमसागर की यात्रा के लिये अंशदान करना चाहें तो उनका UPI Address है – prem12shiv@sbi
प्रेमसागर यात्रा किलोमीटर काउण्टर

प्रेमसागर – यात्रा की प्रकृति बदल गयी है


21 नवम्बर 21, दिन में –

पिछली बार जब मैंने लिखा तो पंद्रह नवम्बर की शाम प्रेमसागर डभोई पंहुचे थे। वहां बद्रीनारायण मंदिर में रुकना हुआ। मंदिर वालों ने उनका काफी सत्कार किया। उनके रेस्ट हाउस में लम्बा रुकना हो गया। लगभग 2000 किमी की विषम यात्रा का फेटीग हावी हुआ है ऐसा लगता है। पहले पच्चीस किमी प्रतिदिन का यात्रा-औसत आता था। माहेश्वर के बाद वह उत्तरोत्तर कम होता गया है। अब वह 15 किमी प्रतिदिन के आसपास है।

उन्होने डभोई से वडोदरा और वडोदरा से बोरसद तक की 60 किमी की यात्रा की है 16-20 नवम्बर के बीच।

मध्य प्रदेश में प्रेमसागर ने विरल आबादी और भरपूर प्रकृति देखी। उस अनुसार देखने और बताने का एक अनुशासन बना लिया था। नदी, घाटी, खेती, बाग, छोटे झोंपड़े, खपरैल आदि बहुत मनोयोग से देखे और बताये। अब परिदृश्य बदल गया है। दरिद्रनारायण की जगह अब मध्य और उच्च वर्ग के लोगों से उनका पाला पड़ा है। यह वर्ग, उनके घर, उनके ड्राइंग रूम, उनके व्यवसाय प्रेमसागर की पूर्व जिंदगी और यात्रा से अलहदा हैं। उनको एक निस्पृह यात्री की नजर से देखना और अनुभूति बताना सरल काम नहीं है। लोग किस तरह का काम करते हैं, कैसे उनके बिजनेस हैं, कैसी उनकी धर्म के इतर सोच है, यह सब देखना और बताना एक अलग प्रवृत्ति मांगता है व्यक्तित्व में। प्रेमसागर सरल व्यक्ति हैं। वे यह सब ऑब्जर्व ही नहीं कर रहे। और यदि कर भी रहे हैं तो अभिव्यक्त नहीं कर पा रहे।

डभोई के बद्रीनारायण मंदिर का सामने का हिस्सा।

उनकी यात्रा गुजराती लोगों की अभूतपूर्व मेहमान नवाजी से बहुत आरामदेह हो गयी है। इतनी आरामदेह कि उनका चलना कम हो गया है। यात्रा आरामदेह हो गयी है पर ट्रेवलॉग लेखन कठिन हो गया है। लिखा क्या जाये? वडोदरा से बोरसद के बीच मैंने नक्शे में देखा कि माही नदी रास्ते में पड़ती है। प्रेमसागर ने उसका जिक्र नहीं किया। मैंने पूछा – रास्ते में एक नदी मिली होगी? प्रेमसागर का उत्तर था कि हां मिली थी। पर उन्हे कुछ खास नहीं लगी। पानी था। पुल बड़ा था। पर सब नदियां एक सी होती हैं तो उन्होने चित्र नहीं लिया। प्रेमसागर का एक माही का एक चित्र होता तो उसके इर्दगिर्द मेरे माही के अनुभव ही खूब उभरते और उससे ही ट्रेवलॉग का अच्छा खासा कण्टेण्ट बन जाता…। पर वह नहीं हुआ। प्रेमसागर यात्रा के फेटीग और मोनोटोनी से ग्रस्त लगते हैं। लोगों से मिलना और उनका सत्कार उन्हे चमत्कृत कर रहा है। वे कम्फर्ट-जोन में हैं और उस जोन में कांवर यात्रा का स्वरूप वह नहीं रहता जो मेरी कल्पना में है। अब वे यू‌ट्यूब, सोशल मीडिया, फालोवर्स की बात करते हैं। मैं चाहता हूं वे केले के गाछ पर बात करें। एक दो दूर से लिये धुंधले चित्र मोर और बंदरों के भेजे हैं। वे लिखने में सहायता नहीं करते।

बोरसद का सूर्यमंदिर। सूरज के सात घोड़े देखें।

डभोई के बद्रीनारायण मंदिर और बोरसद के सूर्य मंदिर के चित्र अच्छे हैं। गुजरात में मंदिर समृद्ध हैं और उनकी बनावट भी झकाझक है। बाहर की पुताई का कलर कॉम्बिनेशन पुराने मंदिरों से अलग है, पर अच्छा लगता है। इनके अतिथि गृह भी निश्चय ही आरामदायक होंगे। डिण्डौरी की नर्मदा किनारे की धर्मशाला से अलग प्रकार-प्रकृति के।

बोरसद से आगे उन्हें इंद्रराज तक जाना था, पर वे आज निकले हैं कि रास्ते में कहीं तारापुर रुकेंगे। वह स्थान 27 किमी दूर नजर आता है नक्शे में। पच्चीस से पैतीस किमी के बीच चलना सही है। ज्यादा चलने पर थकान और अस्वस्थता बहुत होती है। अब तक तो प्रेमसागर का जोश और उनकी रिजर्व ऊर्जा काम आती रही है। उसके बल पर उन्होने वर्षा के विषम महीनों में भी लम्बी लम्बी यात्रायें की। अब उन्हें शरीर की मांग के आधार पर चलना चाहिये। अगर देखा जाये तो पूरी यात्रा का अभी पच्चीस फीसदी ही सम्पन्न हुआ है। आगे के लिये ऊर्जा संचित करना सही स्ट्रेटेजी है – अगर प्रेमसागर कोई स्ट्रेटेजी बना कर चलते हों। 🙂

बहुत से लोगों ने प्रेमसागर की सहायता की है। असल में उन्ही के जरीये वे चल रहे हैं। पर इस पोस्ट में मैं उन सभी का जिक्र जान बूझ कर नहीं कर रहा हूं। उनकी कृपा से यात्रा कम्फर्ट जोन में हो रही है पर वह ट्रेवलॉग के हिसाब से बहुत बढ़िया नहीं है। वह यात्रा तो वैसी ही होती है जिसमें लोग आराम से यूरोप की यात्रा पर जाते हैं और सब मशहूर जगहों पर अपने टनों चित्र खींच कर लौटते हैं – यह बताने के लिये कि एफिल टॉवर के सामने मैंने यह बहुत प्यारी ड्रेस पहनी थी! कांवर यात्रा वृत्तांत वैसा तो कत्तई नहीं हो सकता। और वह बताने के लिये मेरे जैसे “हर चीज चिमटी से पकड़ छीलने वाले (यह फ्रेजॉलॉजी मेरी पत्नीजी की है)” की जरूरत नहीं होती।

मेरी पत्नीजी कहती हैं – “गलती तुममे है। वह प्रेमसागर की यात्रा है; किसी शंकराचार्य या विवेकानंद की नहीं। उस आदमी की सरलता और संकल्प को देखो, तुम काहे दुबले होते हो कि लोगों के ड्राइंग रूम कैसे हैं या कितने लोग प्रेमसागर के पैर छू रहे हैं। वे जो अनुभव कर रहे हैं उसे देखो और चुपचाप वह लिखो जो समझ में आता है। यात्रा को प्रेमसागर की नजर से देखो, अपने चश्मे से नहीं।” … पर मैं कनफ्यूज्ड हूं। शायद प्रेमसागर को यात्रा फेटीग हो न हो, मुझे ट्रेवलॉग फेटीग है।

अपेक्षा करता हूं कि यह फेटीग सोमनाथ नियराते नियराते खत्म हो जायेगा। प्रेमसागर और मैं – हम दोनो नई ऊर्जा से यात्रा करने और यात्रा लिखने में लग जायेंगे।

22 नवम्बर सवेरे –

कल प्रेमसागर ने यात्रा की – बोरसद से तारापुर। रात में जलाराम बापा के मंदिर में ठहरना हुआ। तारापुर बोरसद से तारापुर अठाईस किलोमीटर दूर है। पर वे शाम सात बजे बाद पंहुचे। बोरसद में लोग नाश्ता करा रहे थे, सो निकलने में देर हुई थी।

जलाराम बापा मंदिर में जमीन पग गद्दा बिछा कर सोने का इंतजाम था, कोई घर या रेस्ट हाउस जैसा नहीं। धर्मशाला जैसा। पास के होटल में उन्होने सादा भोजन किया। आज सवेरे वहां से चले तो मैंने उन्हे इस पोस्ट में लिखे मेरे विचारों के बारे में बताया। रास्ते में महादेव की अनुभूति करने और उसे बताने के बारे में पुराने अनुशासन को जीवित करने के बारे में कहा। प्रेम सागर ने तब बताया कि दो दिन पहले पांच लोगोंंका जत्था मिला था जो वैष्णो देवी की पदयात्रा पर निकले थे। उन्हे प्रेमसागर ने पचास रुपये की सहायता भी दी थी। पर उनके बारे में उन्होने न बताया था मुझे न कोई चित्र लिया। इस युग में गुजरात से वैष्णो देवी की डेढ़ हजार किमी की पदयात्रा पर निकलते हैं लोग – यह बड़ी बात है। इसका उल्लेख ही नहीं किया था प्रेमसागर ने! ट्रेवलॉग का एक जरूरी विवरण होना चाहिये था यह। पर प्रेमसागर उस बात को नजर-अंदाज कर दिये थे। वैसे ही जैसे उन्होने माही जैसी महत्वपूर्ण नदी को ओवरलुक किया। खैर, आगे से वे यह यात्रानुशासन पुन: जीवित करेंगे, ऐसा लगता है।

आज सवेरे उन्होने दो चित्र भेजे जो मैं यहां प्रस्तुत करना चाहता हूं –

एक – प्रेमसागर सवेरे साढ़े छ बजे यात्रा प्रारम्भ कर बंदर को कुछ खाने को देते हुये –

प्रेमसागर सवेरे साढ़े छ बजे यात्रा प्रारम्भ कर बंदर को कुछ खाने को देते हुये

दो – यात्रा प्रारम्भ कर रास्ते में सवेरे सात बजे सीताराम जी ने उनकी कांवर देख कर उन्हें रोका और चाय पिलाई।

रास्ते में सवेरे सात बजे सीताराम जी ने उनकी कांवर देख कर उन्हें रोका और चाय पिलाई

मेरे हिसाब से यह महादेव की कृपा से ही हुआ। जब लोगों पर निर्भर रह चाय नाश्ता लेते हैं तो आठ बजे बाद निकल पाते हैं। जब धुंधलके में ही निकल लिये तो सीताराम जैसे मिलते हैं चाय पिलाने के लिये। अब उनमें एक अलग ऊर्जा दिखती है और वह मुझे भी उनकी यात्रा की ओर उन्मुख करेगी। मैंने उनकी यात्रा के बारे में अश्विन पण्ड्या जी से बात भी की। वे गुजरात की आगे की उनकी यात्रा के बारे में गुजरात के बारे में मुझे आवश्यक जानकारी भी देंगे और प्रेमसागर की सहायता भी वे कर ही रहे हैं।

अब लगता है कि प्रेमसागर ट्रेवलॉग के लिये बेहतर इनपुट्स देंगे। आज वे गलियाना तक की यात्रा करने वाले हैं। वह 23-24 किमी आगे है तारापुर से। समय पर वहां पंहुच भी जायेंगे।

हर हर महादेव!


*** द्वादश ज्योतिर्लिंग कांवर पदयात्रा पोस्टों की सूची ***
पदयात्रा के प्रथम चरण में प्रयाग से अमरकण्टक; द्वितीय चरण में अमरकण्टक से उज्जैन और तृतीय चरण में उज्जैन से सोमनाथ की यात्रा है। उन पोस्टों की सूची इस पेज पर दी गयी है।
यात्रा की निकट भूतकाल की कुछ पोस्टें –
66. प्रेमसागर, गुजरात, छोटा उदयपुर और पालिया
67. छोटा उदयपुर से आगे, पालिया, बोडेली
68. प्रेमसागर – बोडेली से डभोई
69. प्रेमसागर – यात्रा की प्रकृति बदल गयी है
70. प्रेमसागर – तारापुर से गलियाना, गुजरात में
71. माँ की याद आती ही है, आंसू टपकते हैं – प्रेमसागर
72. धंधुका – कांवर यात्रा में पड़ा दूसरा रेल स्टेशन
द्वादश ज्योतिर्लिंग कांवर पदयात्रा पोस्टों की सूची
प्रेमसागर पाण्डेय द्वारा द्वादश ज्योतिर्लिंग कांवर यात्रा में तय की गयी दूरी
(गूगल मैप से निकली दूरी में अनुमानत: 7% जोडा गया है, जो उन्होने यात्रा मार्ग से इतर चला होगा) –
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2098 किलोमीटर
प्रेमसागर की यात्रा के लिये अंशदान करना चाहें तो उनका UPI Address है – prem12shiv@sbi
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