नारी, बुढ़ापा और गांव


जाने कितनी योजनायें आयीं। आवास की योजना, शौचालय की योजना, सोलर लाइट की योजना। उन सब योजनाओं ने भी इस महिला को नहीं छुआ। … मेरी पत्नीजी इस को गरीब सवर्ण की सामान्य उपेक्षा का उदाहरण मानती हैं।

रघुनाथ पांड़े जी का मृत्यु-पुराण


रघुनाथ पांड़े कहते हैं – मर जाने पर पूरा इत्मीनान कर लेना। डाक्टर से भी पूछ लेना। कहीं ऐसा न हो कि जान बची रहे। एक चिनगारी छू जाने पर कितना दर्द होता है। पूरी देह आग में जाने पर तो बहुत दर्द होगा। … न हो तो बिजली वाले फ़ूंकने की जगह ले जाना।

रघुनाथ पांड़े और धर्मराज के दूत


रघुनाथ पांंड़े मुझसे बताते हैं – “ई जरूर बा कि ऊ धर्मराज क दूत रहा।” उनके अनुसार स्वर्ग के दूत सफेद कपड़े में गौर वर्ण के होते हैं। यमराज के दूत काले, मोटे और बदसूरत होते हैं।

दसमा – अतीत भी, वर्तमान भी #ग्रामचरित


दसमा दोमंजिले मकान में साफसफाई के लिये नीचे-ऊपर सतत दौड़ती रहती थी। मेरी बड़ी मां को वह एक अच्छी सहायिका मिल गयी थी। लीक से हट कर काम कराने के लिये बड़ी मां उसे दो रुपया और ज्यादा गुड़ देती थीं।