उमाशंकर यादव उर्फ घुमई


घुमई को चलने में दिक्कत है, वर्ना वे पूरी तरह स्वस्थ हैं। “भगवान ई शरीर सौ साल जियई बदे बनये हयें (भगवान ने यह शरीर 100 साल जीने के लिये बनाया है)।” यह कहते हुये जीवन के प्रति उनका प्रबल आशावाद झलकता है।

बैठकी – मरण चर्चा और पुनर्जन्म का सिद्धांत


पिछली चर्चा पर एक महिला जी की टिप्पणी फेसबुक पर प्राप्त हुई – अब मरने की चर्चा कीजिये।  शायद वे साठ और साठोत्तर व्यक्तियों से मरण पर सुनना चाहती हों, या शायद उन्होने इसे यूं ही लिख दिया हो; हमने टिप्पणी को पूरी गम्भीरता से लिया और यह “मरण-चर्चा” कर डाली।

इस जगत के सुख दुख यहीं भोगने हैं


“यह नहीं हो सकता। इस जगत के जो सुख दुख हैं, वे हमें भोगने ही हैं। निर्लिप्त भाव से उन्हें इसी जगत में ही भोग कर खत्म कर दिया जाये, यही उत्तम है। अन्यथा वे अगले जन्म में आपका पीछा करेंगे। उन्हें आपको भोगना तो है ही।”

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