प्रभास तीर्थ (सोमनाथ) में एक दिन


देवी अहिल्याबाई तो दिव्य महिला थीं। उनके नाम से वाराणसी, उज्जैन और सोमनाथ के ज्योतिर्लिंगों के पुनरुद्धार का वर्णन मिलता है। उन्हें तो हिंदू जागरण का मुकुट मानना चाहिये।

2418 कि.मी. की कांवर पदयात्रा कर प्रेमसागर सोमनाथ पंहुचे


बाबा विश्वनाथ तो प्रेमसागर के सदा साथ हैं। यह पूरी यात्रा कोई साधारण यात्रा नहीं, उनकी संकल्प सिद्धि का साधन नहीं; अपने में तीर्थ बन गयी है।

रैवतक-गिरनार के बगल से गुजरे प्रेमसागर


प्रेमसागर 7 दिसम्बर को जूनागढ़ पंहुचे। … यहीं बगल में पूर्व की ओर गिरनार या रैवतक पर्वत है। जिसे देवताओं का निवास माना गया है। इस पर्वत का कई बार उल्लेख महाभारत और हरिवंश पुराण में होता है।

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