बक्सर से सेमरी – सोन नहर


पूरे दिन मैं बक्सर की इस सोन नहर और प्रेमसागर के दिये इनपुट्स से चमत्कृत होता रहा। प्रेमसागर की इस यात्रा से न जुड़ा होता तो मुझे डेढ़ सौ साल पहले का यह सिंचाई इतिहास, जो आज भी सिंचाई के लिये प्रभावी है; पता ही नहीं चलता।

देवरी से कुण्डम का रास्ता


प्रेम सागर पहले अपने संकल्प में, ज्योतिर्लिंगों तक येन केन प्रकरेण पंहुचने में अपनी कांवर यात्रा की सार्थकता मान रहे थे। अब वे यात्रा में हर जगह, हर नदी, पहाड़, झरने, पशु पक्षियों और लोगों में शिव के दर्शन करने लगे हैं।

प्रेमसागर अमरकण्टक को निकल लिये


द्वादश ज्योतिर्लिंग यात्रा के एक महत्वपूर्ण अंश में बलभद्र जी सहायक बने। उनका सहयोग रामेश्वरम सेतु वाली गिलहरी जैसा नहीं, नल-नील जैसा माना जाना चाहिये। उनके रहने से ही प्रेमसागर वह दुर्गम रास्ता पार कर पाये।

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