टाटा डकैत तो नहीं है



अज़दक जी बहुत बढ़िया लिखते हैं. हमें तो लिखने का एक महीने का अनुभव है, सो उनकी टक्कर का लिखने की कोई गलतफ़हमी नहीं है. लेकिन सोचने में फर्क जरूर है. अपने चिठ्ठे में अजदक ने सिंगूर में टाटा के प्लान्ट के लिये हो रहे जमीन के अधिग्रहण को बदनीयती, धांधली, “जनता का पैसा लुटा कर जनहित का नाटक”, जमीन का हड़पना (पढें – डकैती) आदि की संज्ञा दी है.

अब टाटा डकैत तो नहीं है.

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