नेकी, दरिया और भरतलाल पर श्री माधव पण्डित

रिश्ते स्थायी नहीं होते. हम सोचते हैं कि मित्रता शाश्वत रहेगी, पर वैसा नहीं होता. इसी प्रकार दुश्मनी भी शाश्वत नहीं होती. अत: दुश्मन से व्यवहार में यह ध्यान रखो कि वह आपका मित्र बन जायेगा. और मित्र में भविष्य के शत्रु की संभावनायें देख कर चलो.



भरतलाल शर्मा का केस आपने देखा. हम सब में भरतलाल है. हम सभी अपनी माली हैसियत दिखाना चाहते हैं. हम सब में सामाजिक स्वीकृती और प्रशंसा की चाह है. हम सब समाज के हरामीपन (जो मुफ़्त में आपका दोहन करना चहता है) से परेशान भी हैं. 

जब कभी द्वन्द्व में फसें, तब बड़े मनीषियों की शरण लेनी चहिये.

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हरिश्चंद्र – आम जिन्दगी का हीरो

मेहनत की मर्यादा में तपता, जीवन जीता – जूझता, कल्पनायें साकार करता हरिश्चंद्र क्या हीरो नहीं है?



आपकी आँखें पारखी हों तो आम जिन्दगी में हीरो नजर आ जाते हैं. च्यवनप्राश और नवरतन तेल बेचने वाले बौने लगते है. अदना सा मिस्त्री आपको बहुत सिखा सकता है. गीता का कर्म योग वास्तव के मंच पर घटित होता दीखता है.

आपकी आँखों मे परख हो, बस!

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