इँदारा कब उपेक्षित हो गया?


बचपन में गांव का इँदारा (कुआँ) जीवन का केन्द्र होता था. खुरखुन्दे (असली नाम मातादीन) कँहार जब पानी निकालता था तब गडारी पर नीचे-ऊपर आती-जाती रस्सी (लजुरी) संगीत पैदा करती थी. धारी दार नेकर भर पहने उसका गबरू शरीर अब भी मुझे याद है. पता नहीं उसने इँदारे से पानी निकालना कब बंद किया. इँदाराContinue reading “इँदारा कब उपेक्षित हो गया?”

सेप्टिक टैंक से जलीय तत्व के डिस्चार्ज की समस्या


इलाहाबाद जैसे शहर में सीवेज डिस्पोजल प्रणाली में प्रणाली कम है, सीवेज ज्यादा है. इस शहर में आने पर मैने देखा कि हमारे घर में सेप्टिक टेंक है, पर उसका जलीय डिस्चार्ज का लेवल समय के साथ नगर पालिका की नाली के स्तर से नीचे हो गया है. सड़कें व उसके समान्तर नालियां कालान्तर मेंContinue reading “सेप्टिक टैंक से जलीय तत्व के डिस्चार्ज की समस्या”

वर्वर राव, इन्टर्नेट और वैश्वीकरण


वर्वर राव पर एक चिठ्ठा पढ़ा. वर्वर राव (या वारा वारा राव) को मैं पीपुल्स वार ग्रुप के प्रवक्ता के रूप में जानता हूं. सत्तर का दशक होता तो मैं उनका भक्त होता. उस समय जयप्रकाश नारायण में मेरी अगाध श्रद्धा थी. कालान्तर में जेपी को वर्तमान के समाजवादी पार्टी/आरजेडी/जेडी(यू) के वर्तमान नेताओं मे “मॉर्फ”Continue reading “वर्वर राव, इन्टर्नेट और वैश्वीकरण”