किस्सा पांडे सीताराम सूबेदार और मधुकर उपाध्याय


बहुत पहले जब बीबीसी सुना करता था, मधुकर उपाध्याय अत्यंत प्रिय आवाज हुआ करती थी. फिर उनकी किताब किस्सा पांडे सीताराम सूबेदार की समीक्षा वर्ष २००० मे रतलाम में पढी। समीक्षा इतनी रोचक लगी कि वह पुस्तक दिल्ली से फ्रंटियर मेल के कंडक्टर से मंगवाई। पहले बात मधुकर जी की कर ली जाये। मधुकर जीContinue reading “किस्सा पांडे सीताराम सूबेदार और मधुकर उपाध्याय”

निजी सम्पत्ति – नन्दीग्राम – साम्यवाद – कार्पोरेट कल्चर


टाइटल में चार समूहों में शब्द हैं। ये चारों एक दूसरे से जुडे हैं। नन्दीग्राम का बवाल निजी सम्पत्ति को सरकार द्वारा कब्जा कर लेने के यत्न से उपजी किसानों की कुंठा का हिंसात्मक प्रदर्शन है। साम्यवाद निजी सम्पत्ति को अहमियत नहीं देता है। यह अलग बात है की चीन की संसद ने पिछले महीनेContinue reading “निजी सम्पत्ति – नन्दीग्राम – साम्यवाद – कार्पोरेट कल्चर”

गंगा एक्शन प्लान के कर्मी


मैं आपका परिचय गंगा एक्शन प्लान के कर्मियों से कराता हूँ। कृपया चित्र देखें। ये चित्र शिव कुटी, इलाहबाद के हैं और गंगा नदी से आधा मील की दूरी पर लिए गए हैं। इस चित्र में जो सूअर हैं वे पास के मकान से नाली में गिराने वाले मैले की प्रतीक्षा करते हैं। जैसे हीContinue reading “गंगा एक्शन प्लान के कर्मी”

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