अज़दक आजकल हज करने गये हैं/जाने वाले हैं. साम्यवादी विचार धारा वाले व्यक्ति के लिये चीन की यात्रा हज करने के बराबर ही है. वे यांगटीसीक्यांग नदी को निहार इतने गदगदायमान हो गये हैं कि गंगा को महिमा-मण्डित करने वाले भूपेन हजारिका की लत्तेरेकी-धत्तेरेकी कर दी. उनके अनुसार गंगा की स्तुति गा कर भाजपा केContinue reading “यह विशुद्ध मजे के लिये है!”
Monthly Archives: Aug 2007
मैं अंग्रेजी से नकल का जोखिम ले रहा हूं
रीडर्स डाइजेस्ट के अगस्त-2007 अंक में “गिविंग बैक” स्तम्भ में “फ्रूट्स ऑफ प्लेण्टी” नामक शीर्षक से पद्मावती सुब्रह्मण्यन का एक लेख है (पेज 39-40). मुम्बई में 66 वर्षीया सरलाबेन गांधी हर रोज 6 दर्जन केले खरीदती हैं. इतने केले क्यों? कितने नाती-पोते हैं उनके? सरलाबेन केले ले कर 300 मीटर दूर घाटकोपर के राजवाड़ी म्युनिसिपलContinue reading “मैं अंग्रेजी से नकल का जोखिम ले रहा हूं”
मेरी चिंतायें
1. लोग पच्चीस-तीस की उम्र में जड़ हो जाते हैं. पर दाह संस्कार के लिये 80-90 की उम्र तक इंतजार करते हैं. बीच का समय टेलीवीजन की शरण में काटते हैं. यह कैसे रोका जा सकता है? लोगों की जीवंत उम्र कैसे बढ़ाई जा सकती है? 2. ऐसा क्यों है कि दुख-दर्द हमें असीमित लगतेContinue reading “मेरी चिंतायें”
