मानसिक तनाव दूर करने की वनस्पति


श्री पंकज अवधिया की बुधवासरीय अतिथि-पोस्ट। पिछले सप्ताह आपने दांतों के स्वास्थ्य के लिये हल्दी के प्रयोग पर पढ़ा था। आज आप मानसिक तनाव दूर करने के लिये एक वनस्पतीय नुस्खे के बारे में पढ़ें। प्रश्न: दिनभर इतना अधिक मानसिक तनाव हो जाता है कि वही-वही बात दिमाग मे घूमती रहती है। नींद की दवाContinue reading “मानसिक तनाव दूर करने की वनस्पति”

आज दुकान बन्द है!


मुगल सराय -गाजियाबाद खण्ड पर रेल गाड़ियों का रेला है। दो दिन पहले के कुहासे और माल गाड़ियों की संख्या वृद्धि ने यह रूट चोक कर रखा है। जब गाड़ियाँ ज्यादा हों तो छुट पुट आकस्मिक घटनायें भी बहुत अधिक अस्तव्यस्त कर देती हैं यातायात को। उसके बाद दो प्रकार के काम बढ़ जाते हैंContinue reading “आज दुकान बन्द है!”

परशुराम – राम-लक्ष्मण संवाद


परशुराम और राम-लक्ष्मण संवाद विकट स्थिति के प्रबंधन में एक रोचक दृष्टांत प्रस्तुत करता है। परशुराम फैल गये थे शिव जी के धनुष का भंग देख कर। राम और लक्ष्मण को उन्हे नेगोशियेशन में विन-ओवर करना था। नेगोशियेशन में विश्वामित्र, जनक या अन्य राजाओं से कोई फेवरेबल इनपुट मिलने की सम्भावना नहीं थी। परशुराम केContinue reading “परशुराम – राम-लक्ष्मण संवाद”

’सेक्सी’ में कितना सेक्स है?


शिवकुमार मिश्र मेरी तरह ही हैं – नये जमाने के स्लैंग्स से अपरिचित या असहज। उनके (या सही कहें तो हमारे) ब्लॉग पर उनकी पोस्ट पर हरि ओम जी ने टिप्पणी कर दी – sexy artical……….’ enjoyed n learnt a lot….. और शिव इतना ब्लश किये कि अपने बचाव में दन्न से फ्रॉयड को लेContinue reading “’सेक्सी’ में कितना सेक्स है?”

घना कुहासा – एक सूचना


सवेरे सवेरे मेरे गाड़ी-नियन्त्रण कक्ष ने सूचना दी कि गाजियाबाद-कानपुर-झांसी रेल खण्ड में घना कुहासा है। आगरा-बांदीकुई और मथुरा-पलवल खण्ड में भी यही हालत है। कुहासा होने की दशा में ट्रेनें धीमी (सुरक्षित) गति से चलती हैं। स्टेशन के पहले पटरी पर पटाखे लगाये जाते हैं, जिससे उसकी ध्वनि से ट्रेन चालक सतर्क हो जायेContinue reading “घना कुहासा – एक सूचना”

सुनहिं राम जद्यपि सब जानहिं


सुनना हमारे जीवन का महत्वपूर्ण अंग है। सुनाने से कहीं ज्यादा सुनने का महत्व है। सुनने का महत्व, जानने के लिये हो – यह जरूरी नहीं। जानने के लिये तो देखना-सुनना है ही। सुनने के लिये भी सुनना है। जीवन की आपाधापी में सुनना कम हो गया है। तनाव और व्यग्रता ने सुनाना बढ़ा दियाContinue reading “सुनहिं राम जद्यपि सब जानहिं”