अल्लापूजा एक्स्प्रेस में – 24 अक्तूबर


धनबाद से यह गाड़ी अलेप्पी जाती है। नाम अल्लापुजा (या अलप्पुझा) एक्स्प्रेस रखा गया है। विकिपेडिया देखने पर पता चला कि अल्लापुज़ा (उच्चारण में आलपुड़ा जैसा कुछ) अलेप्पी का ही मळयालम नाम है। यूं लगता है अलेप्पी के नाम आलपुझा ( Alappuzha) को धनबाद वालों ने उत्तरभारतीय कृत कर अल्लापुजा बना दिया है! :lol: धनबादContinue reading “अल्लापूजा एक्स्प्रेस में – 24 अक्तूबर”

नियंत्रण कक्ष में महाप्रबन्धक


मुझे अपने जूनियर/सीनियर/प्रशासनिक ग्रेड के प्रारम्भिक वर्ष याद आते हैं। अपनी जोन के महाप्रबंधक का दौरा बहुत सनसनी पैदा करता था। कई दिनों की तैयारी होती थी। पचास-सौ पेज का एक ब्रोशर बनता था। जब ग्राफ/पावरप्वाइण्ट बनाने की सहूलियत नहीं थी, तो उसमें ढेरों आंकड़ों की टेबल्स होती थीं। कालान्तर में एक्सेल/ग्राफ/पावरप्वाइण्ट आदि की उपलब्धताContinue reading “नियंत्रण कक्ष में महाप्रबन्धक”

गंगा किनारे चेल्हा के लिये मशक्कत


बारिश का मौसम बीतने के बाद गंगा सिकुड़ी हैं। उससे पानी उथला हो गया है गंगा किनारे। चेल्हा मछली इस समय किनारे मिलती है। मछेरे उसके लिये जाल डालते हैं, सवेरे सवेरे। मैं जब पंहुचा किनारे पर तो सवेरे के छ बज चुके थे। इस मौसम के हिसाब से कोहरा घना था। मछेरा जाल निकालContinue reading “गंगा किनारे चेल्हा के लिये मशक्कत”

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