विकास चंद्र पाण्डेय से लिया शीशम का शहद

मैंने सोचा – सच में तमस छोड़ना चाहिये और सात्विक भोजन – शहद जिसमें सम्मिलित हो – अपनाना चाहिये। जीवन शहदमय हो!

Vikas chandra pandey Honey

उमरहां के विकास चंद्र पाण्डेय मधुमक्खी पालन करते हैं। खेती किसानी में आम तौर पर लगे इस क्षेत्र के लिये वे ऑउटलायर हैं। उनके बारे में ब्लॉग पर पहले भी लिख चुका हूं – विकास चंद्र पाण्डेय, मधुमक्खी पालक

उनसे दिसम्बर महीने में एक किलो शहद लिया था। उसके बाद एक किलो शहद मित्र मुकेश पाठक जी ने भी भेजा। वह समाप्त होने पर विकास जी से पूछा तो उन्होने बताया कि उनके पास सरसों और शीशम का शहद है। मुकेश जी से सलाह मांगी कि कौन सा बेहतर होता है तो उन्होने बताया कि अगर विकास जी यह बताते हैं कि जहां उन्होने मधुमक्खियों के डिब्बे रखे थे, वहां अगर पर्याप्त शीशम के वृक्ष रहे हों तो वही बेहतर होगा। अन्यथा मधुमक्खियों को ‘फीड’ अलग से देनी होती है और शहद की गुणवत्ता स्तरीय नहीं होती।

पेड़ों की छाया में मधुमक्खियों के बक्से जमा रहे हैं विकास चंद्र पाण्डेय

विकास जी ने बताया कि उनका शीशम वाला स्थान पर्याप्त शीशम के वृक्ष वाला है।

इसलिये मैंने उनसे शीशम का ही शहद लिया। एक छोटी शीशी – करीब ढाई सौ ग्राम – सरसों का शहद भी लिया, उसकी गुणवत्ता जानने के लिये। मुकेश पाठक जी ने बताया था कि वे सभी फूल, जिनसे तेल बनता है, उनका शहद अधिक श्यानता (viscosity) वाला होता है। इस प्रकार सरसों का शहद भी गाढ़ा होता है। इस समय वह अधिक गाढ़ा नहीं दिख रहा था। शायद सर्दियों में जमता हो। अभी तो तापक्रम 38-40डिग्री सेल्सियस हो रहा है।

विकास जी अपने गांव की अमराई में मधुमक्खियों के छत्ते के बक्से रखवा रहे थे। नीचे की जमीन साफ सुथरी कराई थी। कुछ बक्से जमा दिये गये थे। शेष – लगभग पचासी – वे लाने वाल थे। उनके पास कुल 125 बक्से हैं।

बगीचे के पूर्वी कोने पर जमाये गये शहद की मक्खियों के बक्से

“किसी बगीचे/कुंज में पूर्व की ओर के हिस्से में बक्से रखे जाते हैं।” – उनके अनुसार व्यक्ति सवेरे उठते ही सूरज की ओर मुंह करता है। मधुमक्खियाँ भी पूर्व की ओर रुख करती हैं।

घर आ कर विकास जी ने मेरी चौड़े मुंह वाली बॉर्नवीटा की बोतल में शहद देना प्रारम्भ किया। उनकी पत्नी इसमें सहयोग कर रही थीं। एक बर्तन में कनस्तर में रखे शहद से कपड़े से शहद छाना गया। फिर उस बर्तन से मेरे डिब्बे में बॉर्नवीटा के डिब्बे में पल्टा। एक किलो बॉर्नवीटा के डिब्बे में मैं एक किलो शहद लेने गया था, पर ज्यादा आया। यह मेरे कहने पर कि “जितना डिब्बे में आता है, दे दीजिये”; विकास जी ने पूरा डिब्बा भर दिया। तोलने पर वह 2.700 किलो निकला। पैसा विकास जी ने ढाई किलो का ही लिया। साथ में ढाई सौ गाम सरसों का शहद तो मुफ्त की मिल गया मुझे।

घर पर मेरी पत्नीजी ने स्वाद चख कर कहा कि शहद अच्छा है। अब तक उन्हे, पाठक जी और विकास जी के सौजन्य से भांति भांति के फूलों के शहद चखने का आनंद मिल चुका है। उसमें शीशम भी जुड़ गया।

विकास जी ने बताया कि उनके पास लीची का शहद नहीं है, पर वे अपने मित्र से लेकर उपलब्ध करा सकते हैं। उससे यह स्पष्ट हुआ कि इस इलाके के अन्य मधुमक्खी पालकों में जान पहचान, आदान प्रदान होता है।

घर लौटते समय नेशनल हाईवे के पुल की दीवार पर लिखा पाया – “जय गुरुदेव! आने वाला समय खराब। छोड़ो अण्डा मांस, शराब।” मैंने सोचा – सच में तमस छोड़ना चाहिये और सात्विक भोजन – शहद जिसमें सम्मिलित हो – अपनाना चाहिये। जीवन शहदमय हो!

विकास चंद्र पाण्डेय जी के उमरहाँ स्थित घर का लकड़ी का नक्काशीदार मुख्य दरवाजा। ऐसे दरवाजे अब देखने को नहीं मिलते

Author: Gyan Dutt Pandey

Exploring village life. Past - managed train operations of IRlys in various senior posts. Spent idle time at River Ganges. Now reverse migrated to a village Vikrampur (Katka), Bhadohi, UP. Blog: https://gyandutt.com/ Facebook, Instagram and Twitter IDs: gyandutt Facebook Page: gyanfb

2 thoughts on “विकास चंद्र पाण्डेय से लिया शीशम का शहद”

  1. पिछली बार आपके पोस्ट को पढ कर इन्हें संदेश भेजा था जब इन्होंने बताया था कि वे कूरियर से भी शहद भेजते हैं, परंतु कोई जवाब नहीं आया था. अभी फिर से उन्हें संदेश भेजा है. देखते हैं, शायद इस बार प्रत्युत्तर आए. कभी उन्हें याद दिलाएँ कि CRM जैसी चीज भी होती है, भले ही लोग उत्पाद हाथों हाथ बिक रहे हों.. 🙂

    Liked by 1 person

    1. उन्हें बोलूंगा. वैसे कूरियर से भेजने के लिए मुकेश पाठक (राम पुर वाले) का सिस्टम ज्यादा पुख्ता है. वे ज्यादा प्रोफेशनल तरीके से यह व्यवसाय कर रहे हैं.

      Like

Leave a Reply to रवि रतलामी Cancel reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s