मैं उसे बिजूका (scarecrow) के नाम से जानता था, यहां उसे गांव में धोख कहते हैं। शायद धोखा से बना है यह। खेत में किसान की फसल को नुक्सान पंहुचाने वाले हैं जंगली जानवर (नीलगाय या घणरोज़) और अनेक प्रकार की चिड़ियां। उनको बरगलाने या डराने के लिये है यह धोख। खेत के दूसरे किनारेContinue reading “धोख”
Author Archives: Gyan Dutt Pandey
विजय बहादुर बिन्द और दिघवट का टीला
विजय बहादुर बिन्द की झोंपड़ी है दिघवट के टीले पर। वह टीला, जिसको सरसरी निगाह से देखने पर भी 2500 साल पहले की सभ्यता के दर्शन हो जाते हैं – पुरानी बिखरी ईटों और मृद्भाण्ड के टुकड़ों के माध्यम से। वह झोंपड़ी तो टीले की ग्राम सभा की जमीन पर है। झोंपड़ी तो यूं हीContinue reading “विजय बहादुर बिन्द और दिघवट का टीला”
गांव में अजिज्ञासु (?) प्रवृत्ति
गांव में बहुत से लोग बहुत प्रकार की नेम ड्रॉपिंग करते हैं। अमूमन सुनने में आता है – “तीन देई तेरह गोहरावई, तब कलजुग में लेखा पावई” (तीन का तेरह न बताये तो कलयुग में उस व्यक्ति की अहमियत ही नहीं)। हांकने की आदत बहुत दिखी। लोगों की आर्थिक दशा का सही अनुमान ही नहींContinue reading “गांव में अजिज्ञासु (?) प्रवृत्ति”
