हाथों से मछली बीनते बच्चे


वे चार बच्चे थे। गंगाजी जब बरसात के बाद सिमटीं तो छोटे छोटे उथले गढ्ढे बनने लग गये पानी के।  उनमें हैं छोटी छोटी मछलियां। पानी इतना कम और इतना छिछला है कि हाथों से मछलियां पकड़ी जा सकती हैं। वे चारों हाथ से मछली पकड़ रहे थे। पकड़ना उनके लिये खेल भी था। एकContinue reading “हाथों से मछली बीनते बच्चे”

सिविल सर्विसेज़ का बदलता स्वरूप – श्री विवेक सहाय से मुलाकात का जिक्र


पिछले दिनों भारतीय नौकरशाही में हो रहे चरित्रगत परिवर्तनों के बारे में अहसास के दो अवसर मेरे समक्ष आये। एक था, फॉर्ब्स इण्डिया पत्रिका में एक पुस्तक की समीक्षा पढ़ने के रूप में और दूसरा था, हाल ही में रिटायर हुये रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष श्री विवेक सहाय से मुलाकात के रूप में। मैं दोनोContinue reading “सिविल सर्विसेज़ का बदलता स्वरूप – श्री विवेक सहाय से मुलाकात का जिक्र”

लोकपाल आ गया तो इनका क्या होगा?


हिसार में कानग्रेस की जमानत जब्त होली है। चार सीटों के चुनाव में जीरो बटा सन्नाटा ही रहा है उसके लिये। टेलीवीजन पर जितना भी फौंकें, पुलपुली जरूर कांप रही होगी। ऐसे में शीतकालीन सत्र में मजबूत लोकपाल ले आये तो मेरे घर के आस पास के इनफार्मल सेक्टर का क्या होगा? रविवार को मैंContinue reading “लोकपाल आ गया तो इनका क्या होगा?”

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