संकर दुकान कब खोलिहैं!


शंकर पासवान का हेयर कटिंग सैलून है मेरे घर के पास नुक्कड़ पर। लम्बे अर्से से दुकान बन्द थी। शंकर का ब्याह था। व्याह के बाद हनीमून। परिणाम यह हुआ कि मेरे बाल झपोली बन गये। एक आध बार तो शैम्पू पिलाना पड़ा उन्हे। अन्यथा लट पड़ने के चांसेज़ थे। अंतत: आज पता चला किContinue reading “संकर दुकान कब खोलिहैं!”

हिन्दी हितैषणा वाया जर्सी गाय


हिन्दी ‘सेवा’ की बात ब्लॉगजगत में लोग करें तो आप भुनभुना सकते हैं। पर आपके सपोर्ट में कोई आता नहीं। पता नहीं, इतने सारे लोग हिन्दी की सेवा करना चाहते हैं। हिन्दी ब्लॉगजगत में सभी स्वार्थी/निस्वार्थी हिन्दी को चमकाने में रत हैं और हिन्दी है कि चमक ही नहीं रही। निश्चय ही हिन्दी सेवा पाखण्डContinue reading “हिन्दी हितैषणा वाया जर्सी गाय”

मिराण्डा चेतावनी


मैं अर्थर हेली का उपन्यास डिटेक्टिव  पढ़ रहा था। नेट पर नहीं, पुस्तक के रूप में। यह पुस्तक लगभग दस बारह साल पहले खरीदी थी। लुगदी संस्करण, फुटपाथ से। नकली छपाई होने के चलते इसमें कुछ पन्ने धुन्धले हैं – कुछ हिस्सों में। इसी पढ़ने की दिक्कत के कारण इसे पढ़ना मुल्तवी कर दिया था। [लुगदीContinue reading “मिराण्डा चेतावनी”

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