कल्लू का बिजूका


अरविन्द वहीं था, गंगा किनारे अपने कोन्हड़ा-नेनुआ के खेत पर। अब वह मुझे पहचानने लगा है; सो दूर से ही उसने नमस्ते करी। मैं उसकी ओर मुड़ा तो बोला – जरा बच के आइयेगा। नीचे नेनुआ के पौधे हैं। पिछले दिनों की सर्दी से पनपे नहीं। वास्तव में नीचे सम दूरी पर जरा-जरा से पौधेContinue reading “कल्लू का बिजूका”

गांववालों, तुम्हारी बार्गेनिंग पावर कहां है?


इलाहाबाद के पास करछना तहसील में जेपी अशोसियेट्स समूह का एक 2000 मेगावाट क्षमता का पावर हाउस आने वाला है। यह जगह टौंस नदी के किनारे है। इस जगह से टौंस नदी लगभग 4-5 किलोमीटर आगे गंगा में मिलती है। गांगेय मैदान की अत्यंत उपजाऊ जमीन। लगभग 500-1000 हेक्टेयर जमीन पर बनने जा रहा हैContinue reading “गांववालों, तुम्हारी बार्गेनिंग पावर कहां है?”

फाइबर ऑप्टिक्स की चोरी


यूपोरियन (UPorean – उत्तरप्रदेशीय) परिवेश में अगर संखिया (विष) भी सार्वजनिक स्थल पर हो तो चुरा लिया जायेगा। ऑप्टिक फाइबर केबल की कौन कहे। ऑप्टिक फाइबर केबल रेल पटरियों के साथ साथ फाइबर ऑप्टिक्स की केबल्स का जाल बिछा है। मेरे अपने सिस्टम – उत्तर-मध्य रेलवे मेँ निम्न खण्डों पर फाइबर ऑप्टिक्स की 24-फाइबर कीContinue reading “फाइबर ऑप्टिक्स की चोरी”

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