गूगल बज़ पर ब्लॉग पोस्टें बड़ी सरलता से जा रही हैं। लोग वहीं धो-पोंछ ले रहे हैं। पर जो गूगल बज़ से प्रारम्भ होता है, वह ब्लॉग में आने का रीवर्स माइग्रेशन अगर चल निकले तो मजा आये। मैने एक हिन्दी सेवात्मक बज़ लिखा था। जो पर्याप्त बज़ा। उसपर प्राइमरी के मास्टर जी ने पुन:Continue reading “हें हें हें, यह हिन्दी सेवा में है!”
Author Archives: Gyan Dutt Pandey
पिज्जा, खिलौना, विकल्प और मानव जीवन
यह प्रवीण पाण्डेय की बुधवासरीय अतिथि पोस्ट है। एक सामान्य घरेलू स्थिति से दर्शन में कैसे उतरा जाता है, वह प्रवीण से सीखने योग्य है: बच्चों की परीक्षायें समाप्त हुयीं और घर के वातावरण का उत्सवीकरण हो गया। अब युद्धक्षेत्र से लौटे विजयी (लगता तो है) योद्धाओं को उपहार चाहिये। निश्चय हुआ कि पहले वसुधैवContinue reading “पिज्जा, खिलौना, विकल्प और मानव जीवन”
डेमी गॉड्स बनने के चांस ही न थे!
भारतीय रेल यातायात सेवा के वार्षिकोत्सव पर गीत गाते श्री विवेक सहाय; सदस्य यातायात, रेलवे बोर्ड। वह जमाना सत्तर-अस्सी के दशक का था जब सरकारी ग्रुप ए सेवा का बहुत वजन हुआ करता था। मुझे एम वी कामथ का एक अखबार में लेख याद है कि स्कूली शिक्षा में मैरिट लिस्ट में आने पर लड़केContinue reading “डेमी गॉड्स बनने के चांस ही न थे!”
