यह साल बॉयोग्राफी के नाम सही!


ये सभी सही पात्र हैं, जीवनी लेखन के। इनके माध्यम से आधुनिक समय में ताराशंकर बंद्योपाध्याय के गणदेवता या मुन्शी प्रेमचंद के कई उपन्यासों का सीक्वेल बन सकता है। पर वह सब करने के लिये मुझे जीवनी विधा का बारीकी से अध्ययन करना चाहिये।

अशोक शुक्ल ने दैनिक पूजा का लाभ बताया, और वह बड़ा लाभ है!


अशोक पण्डित ने कहा कि शोक और दु:ख अलग अलग मानसिक अवस्थायें हैं। जहां दु:ख का मूल अभाव में है; वहीं शोक अज्ञान से उपजता है – अज्ञान प्रभवं शोक: (गरुड़ पुराण)।

पद्मजा के नये प्रयोग


गांव में रहने के कुछ स्वाभाविक नुकसान हैं; पर यहां सीखने को शहर के बच्चे से कम नहीं है। शायद वह जो सीख पाये; वह शहरी बच्चे कभी अनुभव न कर सकें। वह भाषा, मैंनरिज्म और आत्मविश्वास में उन्नीस न पड़े; बाकी सब तो उसके पास जो है, वह बहुत कम को मिलता होगा अनुभव के लिये!

Design a site like this with WordPress.com
Get started