बाल पण्डितों का श्रम


शिवकुटी में गंगा तीर पर सिसोदिया की एक पुरानी कोठी है। उसमें चलता है एक संस्कृत विद्यालय। छोटे-बड़े सब तरह के बालक सिर घुटा कर लम्बी और मोटी शिखा रखे दीखते हैं वहां। यहां के सेमी-अर्बन/कस्बाई माहौल से कुछ अलग विशिष्टता लिये। उनके विद्यालय से लगभग 100 मीटर दूर हनूमान जी के मन्दिर के पासContinue reading “बाल पण्डितों का श्रम”

साइकल कसवाने का आह्लाद


बनारस में अंश के लिये साइकल कसवाई जा रही थी। अब बड़ा हो गया है वह। साइकल चलाने लायक। उसके पिताजी ने मुझे मोबाइल पर साइकल कसवाने की सूचना दी। वे बनारस में साइकल की दूकान पर और मैं इलाहाबाद में अपने दफ्तर में। मैने कहा – जरा साइकल का चित्र तो दिखाइये! बस कुछContinue reading “साइकल कसवाने का आह्लाद”

फाइबर ऑप्टिक्स की चोरी


यूपोरियन (UPorean – उत्तरप्रदेशीय) परिवेश में अगर संखिया (विष) भी सार्वजनिक स्थल पर हो तो चुरा लिया जायेगा। ऑप्टिक फाइबर केबल की कौन कहे। ऑप्टिक फाइबर केबल रेल पटरियों के साथ साथ फाइबर ऑप्टिक्स की केबल्स का जाल बिछा है। मेरे अपने सिस्टम – उत्तर-मध्य रेलवे मेँ निम्न खण्डों पर फाइबर ऑप्टिक्स की 24-फाइबर कीContinue reading “फाइबर ऑप्टिक्स की चोरी”

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