सादा जीवन और गर्म होती धरती


यह पोस्ट आगे आने वाले समय में पर्यावरण परिवर्तन, ऊर्जा का प्रति व्यक्ति अंधाधुंध बढ़ता उपभोग और उसके समाधान हेतु श्री सुमन्त मिश्र कात्यायन जी के सुझाये सादा जीवन उच्च विचार के बारें में मेरी विचार हलचल को ले कर है। “सादा जीवन उच्च विचार” – अगर इसको व्यापक स्तर पर व्यवहारगत बनाना हो तोContinue reading “सादा जीवन और गर्म होती धरती”

कीचड़ उछाल स्पर्धा


जब मुद्दे नहीं होते उछालने को तो कीचड़ उछाली जाती है। हाथ काट डालने से यह सिलसिला शुरू हुआ था। लेटेस्ट है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ व्याभिचारियों की जमात है। मेरी पुरानी पोस्ट से: मैं हिन्दू हूं – जन्म से और विचारों से। मुझे जो बात सबसे ज्यादा पसन्द है वह है कि यह धर्मContinue reading “कीचड़ उछाल स्पर्धा”

प्रच्छन्न दार्शनिक


अचानक सड़क के किनारे सामान बेचने वाले से बहुत स्तर ऊपर उठकर मुझे वह संत-दार्शनिक लगने लगे। एक प्रच्छन्न दार्शनिक (दार्शनिक इन डिस्गाइज!)। आज भी वह वहीं था – नारायण आश्रम के पेवमेण्ट पर बेल के फल लिये। उनके आकार के अनुसार दो ढेरियों में बांट रखा था फलों को। दो पोस्टों में जिक्र करContinue reading “प्रच्छन्न दार्शनिक”

Design a site like this with WordPress.com
Get started