वृक्षारोपण ॥ बाटी प्रकृति है


  पण्डित शिवानन्द दुबे मेरे श्वसुर जी ने पौधे लगाये थे लगभग १५ वर्ष पहले। वे अब वृक्ष बन गये हैं। इस बार जब मैने देखा तो लगा कि वे धरती को स्वच्छ बनाने में अपना योगदान कर गये थे। असल में एक व्यक्ति के पर्यावरण को योगदान को इससे आंका जाना चाहिये कि उसनेContinue reading “वृक्षारोपण ॥ बाटी प्रकृति है”

क्या “लेफ्ट”, “राइट” नहीं है?


मैं घर से बाहर जा रहा था। मेरे दायें हाथ में ब्रीफ केस था। अचानक याद आया कि मैने पर्स नहीं लिया है। मैने हमेशा की तरह जोर से बोला – पर्स देना। मेरी ३४ साल की निष्ठा से बंधी पत्नी तेजी से बेडरूम की तरफ गयीं और पर्स ले आयीं। श्री जी विश्वनाथ औरContinue reading “क्या “लेफ्ट”, “राइट” नहीं है?”

प्रतिस्पर्धा


मैं मुठ्ठीगंज में दाल के आढ़तिये की गद्दी पर गया था -  अरहर की पचास किलो दाल लाने के लिये। दाल कोई और ला सकता था, पर मात्र जिज्ञासा के चलते मैं लाने गया। प्रतिस्पर्धा कर्मठ व्यक्ति को आगे बढ़ाती है। तकनीकी विकास यह फैक्टर ला रहा है बिजनेस और समाज में। यह प्रतिस्पर्धा उत्तरोत्तरContinue reading “प्रतिस्पर्धा”

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